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एनसीडी क्लीनिक पर कागजों में कर दी दो हजार लोगों की फिजियोथैरेपी
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मेडिकल कॉलेज स्थित एनसीडी क्लीनिक ।संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। मेडिकल कॉलेज में एनसीडी क्लीनिक संचालित है। यहां पर छह लोगों को का स्टाफ है। फिजियोथैरेपी के लिए मशीनें खरीदी गई हैं, लेकिन हकीकत में एक भी थैरेपी नहीं हुई। जबकि कागजों में दो हजार से अधिक लोगों की फिजियोथैरेपी कर दी गई।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की पहल पर नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) क्लीनिक खोले गए। मेडिकल कॉलेज सहित जिले में छह क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। यहां पर मधुमेह, गुर्दे की पुरानी बीमारी, हृदय रोग, स्ट्रॉक, ऑस्टियोपोरोसिस, अल्जाइमर, मोतियाबिंद आदि गैर संचारी रोगों की पहचान करने के लिए मानव संसाधन और मशीनरी सरकार की ओर से मुहैया कराई गई, लेकिन क्लीनिक से एनालाइजर और सीबीसी तक की मशीनें गायब हो चुकी हैं।
जिला अस्पताल में एनसीडी क्लीनिक पर एक एमबीबीएस डॉ. चेतन चौहान, फिजियोथैरेपिस्ट दीप्ति, स्टाफ नर्स रूबी यादव व दुर्गेश, काउंसलर शिल्पी और कंप्यूटर ऑपरेटर सुमन यादव तैनात हैं। क्लीनिक पर मात्र शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच के अलावा अन्य कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। फिजियोथैरिपिस्ट ने एक वर्ष में कोई भी थैरेपी मरीजों को नहीं दी।
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जबकि दस्तावेजों में जनवरी 2021 से नवंबर माह तक 2059 की फिजियोथैरेपी कर दी गई है। इनमें 895 महिलाएं और 1164 पुरुष शामिल हैं। एनसीडी क्लीनिक पर आंकड़ों में बाजीगरी करने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को भी शामिल किया गया। हकीकत यह है कि क्लीनिक में न तो मशीन लगी है और न ही बेड की व्यवस्था है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की पहल पर नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) क्लीनिक खोले गए। मेडिकल कॉलेज सहित जिले में छह क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। यहां पर मधुमेह, गुर्दे की पुरानी बीमारी, हृदय रोग, स्ट्रॉक, ऑस्टियोपोरोसिस, अल्जाइमर, मोतियाबिंद आदि गैर संचारी रोगों की पहचान करने के लिए मानव संसाधन और मशीनरी सरकार की ओर से मुहैया कराई गई, लेकिन क्लीनिक से एनालाइजर और सीबीसी तक की मशीनें गायब हो चुकी हैं।
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जिला अस्पताल में एनसीडी क्लीनिक पर एक एमबीबीएस डॉ. चेतन चौहान, फिजियोथैरेपिस्ट दीप्ति, स्टाफ नर्स रूबी यादव व दुर्गेश, काउंसलर शिल्पी और कंप्यूटर ऑपरेटर सुमन यादव तैनात हैं। क्लीनिक पर मात्र शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच के अलावा अन्य कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। फिजियोथैरिपिस्ट ने एक वर्ष में कोई भी थैरेपी मरीजों को नहीं दी।
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जबकि दस्तावेजों में जनवरी 2021 से नवंबर माह तक 2059 की फिजियोथैरेपी कर दी गई है। इनमें 895 महिलाएं और 1164 पुरुष शामिल हैं। एनसीडी क्लीनिक पर आंकड़ों में बाजीगरी करने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को भी शामिल किया गया। हकीकत यह है कि क्लीनिक में न तो मशीन लगी है और न ही बेड की व्यवस्था है।