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‘पौधों में बसते हैं हमारे प्राण, बच्चों की तरह करें देखभाल’
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अपने आवास पर बनाई गई बगिया में पौधों की देखभाल करते सांसद हरनाथ सिंह यादव। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। पेड़-पौधों में हमारे प्राण बसते हैं। वह बस छोटे बच्चों की तरह देखभाल चाहते हैं। अमर उजाला फाउंडेशन इस रक्षाबंधन पर्व पर पेड़-पौधों की रक्षा के लिए पहल कर रहा है। पर्यावरण और जन हित के इस पुण्य कार्य में आप भी जुड़कर पेड़-पौधों को रक्षा सूत्र बांधें व उनकी रक्षा का संकल्प लें।
इनसे सीखें: इन्होंने तो घर को बना दिया बाग, बन गए बागवान
एटा। राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह में पौधों से गजब का प्रेम है। उन्होंने अपने घर को ही बाग का रूप दे दिया है। जिसमें 500 से अधिक पौधे लगाए हैं। यही नहीं, उनकी देखभाल कर खुद बागवान के तौर पर कार्य करते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि शहर के छोटे मकानों में पेड़-पौधे कैसे लगाएं। ऐसे लोगों के लिए शांति नगर स्थित सांसद का आवास किसी प्रेरणा से कम नहीं।
सांसद बताते हैं कि शांति नगर में 20 साल पहले आवास बनवाया। तभी से पौधे लगाना शुरू कर दिए। पौधों का शौक ऐसा रहा कि जिस शहर में पहुंचे वहां की नर्सरी जाकर दो-चार पौधे खरीद लेते। इस तरह पौधों की संख्या बढ़ती गई। हर दिन का नियम है कि सुबह सबसे पहले एक-एक पौधे की जांच करते हैं। कोई दिक्कत है तो उसमें दवा लगाते हैं। संसद सत्र या अन्य किसी वजह से बाहर होते हैं तो दिन में कम से कम एक बार फोन कर पौधों की जानकारी लेते हैं। वह कहते हैं कि पौधों की देखभाल वह स्वयं ही करते हैं। उन्हें आज तक खुद से अच्छा माली कोई नहीं मिला। संवाद
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इनसे सीखें: इन्होंने तो घर को बना दिया बाग, बन गए बागवान
एटा। राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह में पौधों से गजब का प्रेम है। उन्होंने अपने घर को ही बाग का रूप दे दिया है। जिसमें 500 से अधिक पौधे लगाए हैं। यही नहीं, उनकी देखभाल कर खुद बागवान के तौर पर कार्य करते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि शहर के छोटे मकानों में पेड़-पौधे कैसे लगाएं। ऐसे लोगों के लिए शांति नगर स्थित सांसद का आवास किसी प्रेरणा से कम नहीं।
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सांसद बताते हैं कि शांति नगर में 20 साल पहले आवास बनवाया। तभी से पौधे लगाना शुरू कर दिए। पौधों का शौक ऐसा रहा कि जिस शहर में पहुंचे वहां की नर्सरी जाकर दो-चार पौधे खरीद लेते। इस तरह पौधों की संख्या बढ़ती गई। हर दिन का नियम है कि सुबह सबसे पहले एक-एक पौधे की जांच करते हैं। कोई दिक्कत है तो उसमें दवा लगाते हैं। संसद सत्र या अन्य किसी वजह से बाहर होते हैं तो दिन में कम से कम एक बार फोन कर पौधों की जानकारी लेते हैं। वह कहते हैं कि पौधों की देखभाल वह स्वयं ही करते हैं। उन्हें आज तक खुद से अच्छा माली कोई नहीं मिला। संवाद
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