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मेडिकल कॉलेज में मिल रहा सिर्फ परामर्श
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एटा। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को सिर्फ चिकित्सकीय परामर्श मिल पा रहा है। मरीजों को अधिकांश दवाएं अस्पताल में नहीं मिल रही हैं। ऐसे में वह दवाएं बाहर से खरीदने के लिए मजबूर है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की हालत खराब है जो बाजार से दवाएं नहीं खरीद पा रहे हैं।
वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल का विलय हुआ है, तबसे लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा मुसीबतें खड़ी हो गई हैं। सबसे बुरा हाल मार्च 2022 से हुआ है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दवाओं में कटौती कर दी। ओपीडी में आने वाले बीमारों को दवाओं का वितरण बंद कर दिया। नया नियम लागू किया गया कि मरीज को भर्ती करके ही इलाज किया जाएगा। भर्ती करने की जटिलताएं ऐसी हैं कि पसीने छूट जाते हैं। मरीज आसानी से भर्ती नहीं हो पाता है। जबकि कई छोटी-मोटी बीमारियों में भर्ती होने की जरूरत तक नहीं होती। इसके बावजूद मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ओपीडी में चिकित्सक एक मरीज को सामान्य तौर पर चार से छह तरह की दवाएं लिखते हैं। दवा वितरण केंद्र पर इनमें से एक या दो तरह की दवाएं ही दी जाती हैं। शेष दवाएं मरीजों को बाजार से ही खरीदनी पड़ रही हैं।
पैर में चोट लगने से घाव हो गया है। इस पर मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों को दिखाया तो दवाएं लिख दी गईं, लेकिन घाव को साफ करने और लगाने के लिए लोशन व ट्यूब नहीं मिला। बाजार से खरीदना पड़ा। - रूपेश कुमार, रिजोर
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आंखों में खुजली व पानी आने की समस्या है। मेडिकल कॉलेज में दवाएं लिखी गईं, लेकिन आधी ही दवाएं दी गईं हैं। अन्य दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ेंगी। - पूरन देवी, जीटी रोड
चिकित्सकों ने फेफड़ों में परेशानी बताई है। भर्ती करके इलाज करने की सलाह दी, लेकिन बहुत ज्यादा प्रक्रियाएं होने की वजह से भर्ती नहीं हो सका। दवाएं लेने गया तो आधी ही मिली हैं। - आदित्य कुमार, सुनहरी नगर
कई दिनों से खुजली और पेट दर्द की दिक्कत है। बृहस्पतिवार को दो पर्चा बनवाकर अलग-अलग डॉक्टरों को दिखाया। दोनों ही पर्चों पर पूरी दवाएं नहीं मिलीं। - सत्यपाल सिंह, धुमरी
मेडिकल कॉलेज में आईपीडी को पूरा करना होता है, इसकी दवा शासन से मिलती हैं। इसलिए भर्ती करके ही दवाएं दी जा रही हैं। वितरण केंद्र पर दवाएं कम मिलती हैं, जबकि वार्ड में मरीज को पूरी दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। - डॉ. विवेक पाराशर, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज
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वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल का विलय हुआ है, तबसे लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा मुसीबतें खड़ी हो गई हैं। सबसे बुरा हाल मार्च 2022 से हुआ है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दवाओं में कटौती कर दी। ओपीडी में आने वाले बीमारों को दवाओं का वितरण बंद कर दिया। नया नियम लागू किया गया कि मरीज को भर्ती करके ही इलाज किया जाएगा। भर्ती करने की जटिलताएं ऐसी हैं कि पसीने छूट जाते हैं। मरीज आसानी से भर्ती नहीं हो पाता है। जबकि कई छोटी-मोटी बीमारियों में भर्ती होने की जरूरत तक नहीं होती। इसके बावजूद मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ओपीडी में चिकित्सक एक मरीज को सामान्य तौर पर चार से छह तरह की दवाएं लिखते हैं। दवा वितरण केंद्र पर इनमें से एक या दो तरह की दवाएं ही दी जाती हैं। शेष दवाएं मरीजों को बाजार से ही खरीदनी पड़ रही हैं।
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पैर में चोट लगने से घाव हो गया है। इस पर मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों को दिखाया तो दवाएं लिख दी गईं, लेकिन घाव को साफ करने और लगाने के लिए लोशन व ट्यूब नहीं मिला। बाजार से खरीदना पड़ा। - रूपेश कुमार, रिजोर
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आंखों में खुजली व पानी आने की समस्या है। मेडिकल कॉलेज में दवाएं लिखी गईं, लेकिन आधी ही दवाएं दी गईं हैं। अन्य दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ेंगी। - पूरन देवी, जीटी रोड
चिकित्सकों ने फेफड़ों में परेशानी बताई है। भर्ती करके इलाज करने की सलाह दी, लेकिन बहुत ज्यादा प्रक्रियाएं होने की वजह से भर्ती नहीं हो सका। दवाएं लेने गया तो आधी ही मिली हैं। - आदित्य कुमार, सुनहरी नगर
कई दिनों से खुजली और पेट दर्द की दिक्कत है। बृहस्पतिवार को दो पर्चा बनवाकर अलग-अलग डॉक्टरों को दिखाया। दोनों ही पर्चों पर पूरी दवाएं नहीं मिलीं। - सत्यपाल सिंह, धुमरी
मेडिकल कॉलेज में आईपीडी को पूरा करना होता है, इसकी दवा शासन से मिलती हैं। इसलिए भर्ती करके ही दवाएं दी जा रही हैं। वितरण केंद्र पर दवाएं कम मिलती हैं, जबकि वार्ड में मरीज को पूरी दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। - डॉ. विवेक पाराशर, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज