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एटा: कभी रोजी के लिए भटके, अब सैकड़ों लोगों को दे रहे रोजगार
Thu, 09 Feb 2023 11:24 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 09 Feb 2023 11:24 PM IST
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एटा। घर का खर्च चलाना कठिन हो गया। दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से नसीब हो रही थी। मुसीबतों से घिरे विकासखंड शीतलपुर के आशीष कुमार शर्मा रोजी के लिए भटक रहे थे। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ऋण लेकर ईश्वर की पोशाक बनाने का कारोबार शुरू किया, जो बढ़ता गया और कई मशीनें लगा ली है। अब सैकड़ों लोगों को वह रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
अलीगंज मार्ग स्थित विकासखंड शीतलपुर के गांव नगला भोज निवासी आशीष कुमार शर्मा की हालत साल 2019 से पहले बहुत खराब थी। 2019 में वह अपने मित्र के पास वाराणसी चले गए। जहां उन्होंने सिलाई, कढ़ाई आदि का काम सीखा। उसके बाद उन्होंने यहां लौटकर केनरा बैंक से पीएम स्वरोजगार योजना के तहत करीब 10 लाख रुपये का ऋण लेकर घर पर ही पोशाक का कारोबार शुरू किया।
उस समय कर्मचारी रखने की हैसियत नहीं थी। अपनी पत्नी, भाई और मां के साथ मिलकर भगवान की पोशाक बनाने का काम शुरू कर दिया। एक साल में ही कारोबार बढ़ने लगा तो उन्होंने गांव की महिलाओं को रोजगार देना शुरू किया। वर्तमान में सौ से अधिक महिलाएं यहां पर काम सीखने के साथ ही रोजगार भी कर रही हैं।
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दूसरे जिलों में भेजते हैं पोशाक
आशीष ने बताया कि घर पर बनाई गई भगवान की पोशाकों को मथुरा, आगरा, वृंदावन, दिल्ली, बनारस आदि शहरों में सप्लाई करते हैं। जिससे अच्छा मुनाफा मिल जाता है। वर्तमान में महीने पर करीब एक लाख रुपये कमा रहे हैं।
महिलाओं को आने-जाने की सुविधा उपलब्ध
गांव नगला भोज के आसपास की महिलाओं को रोजगार देने के साथ ही उन्हें घर से लाने व छोड़ने की भी व्यवस्था आशीष ने कर रखी है। निजी वाहनों के माध्यम से वह अपने खर्चे से महिलाओं को उनके घर पहुंचाते हैं।
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अलीगंज मार्ग स्थित विकासखंड शीतलपुर के गांव नगला भोज निवासी आशीष कुमार शर्मा की हालत साल 2019 से पहले बहुत खराब थी। 2019 में वह अपने मित्र के पास वाराणसी चले गए। जहां उन्होंने सिलाई, कढ़ाई आदि का काम सीखा। उसके बाद उन्होंने यहां लौटकर केनरा बैंक से पीएम स्वरोजगार योजना के तहत करीब 10 लाख रुपये का ऋण लेकर घर पर ही पोशाक का कारोबार शुरू किया।
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उस समय कर्मचारी रखने की हैसियत नहीं थी। अपनी पत्नी, भाई और मां के साथ मिलकर भगवान की पोशाक बनाने का काम शुरू कर दिया। एक साल में ही कारोबार बढ़ने लगा तो उन्होंने गांव की महिलाओं को रोजगार देना शुरू किया। वर्तमान में सौ से अधिक महिलाएं यहां पर काम सीखने के साथ ही रोजगार भी कर रही हैं।
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दूसरे जिलों में भेजते हैं पोशाक
आशीष ने बताया कि घर पर बनाई गई भगवान की पोशाकों को मथुरा, आगरा, वृंदावन, दिल्ली, बनारस आदि शहरों में सप्लाई करते हैं। जिससे अच्छा मुनाफा मिल जाता है। वर्तमान में महीने पर करीब एक लाख रुपये कमा रहे हैं।
महिलाओं को आने-जाने की सुविधा उपलब्ध
गांव नगला भोज के आसपास की महिलाओं को रोजगार देने के साथ ही उन्हें घर से लाने व छोड़ने की भी व्यवस्था आशीष ने कर रखी है। निजी वाहनों के माध्यम से वह अपने खर्चे से महिलाओं को उनके घर पहुंचाते हैं।