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Etah News: औसतन छह हजार लोग देते हैं नोटा की चोट

Sat, 23 Mar 2024 11:48 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Sat, 23 Mar 2024 11:48 PM IST
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On an average, six thousand people give NOTA notice.
एटा। चुनाव में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को नकारने का अधिकार दिया गया है। एटा लोकसभा सीट पर औसतन रूप से 6 हजार मतदाता नोटा (नन ऑफ द एबव) की चोट करते हैं। ये आंकड़े 2014 और 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आए।
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पूर्व के चुनावों में मतदाताओं के पास इस तरह का कोई विकल्प नहीं होता था। जो प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े होते थे, मजबूरन उन्हें वोट करना या वोट देने के बजाय घर में बैठे रहने के अलावा वह कुछ नहीं कर सकते थे। इससे मतदान प्रतिशत में भी गिरावट आने की संभावना रहती थी। वहीं प्रत्याशियों को लेकर लोगों की राय भी पता नहीं लग पाती थी। नोटा के साथ पहली बार 2014 में लोकसभा चुनाव हुआ। इसमें एटा लोकसभा सीट पर 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जबकि 12वें स्थान पर ईवीएम में नोटा के बटन को जगह दी गई। 6201 लोगों ने इस बटन का इस्तेमाल कर सभी प्रत्याशियों को नकार दिया। जबकि 3 लोगों ने पोस्टल बैलट से भी नोटा के पक्ष में वोट किया। वहीं 2019 में 14 उम्मीदवारों के बीच चुनाव हुआ। इसमें 6277 मतदाताओं ने ईवीएम और 13 ने पोस्टल बैलट के जरिए नोटा का चयन किया।
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2014 में 6 तो 2019 में 11 प्रत्याशी नोटा से हारे
इन दोनों चुनावों में नोटा की ताकत का यह भी रोचक पहलू है कि तमाम उम्मीदवार इसके बराबर वोट नहीं जुटा पाए। 2014 के चुनाव में कुल 11 प्रत्याशियों में से 6 ऐसे थे जो नोटा से भी हार गए। इनको मिले वोट नोटा से कम थे। वहीं 2019 में कुल 14 प्रत्याशी थे। भाजपा, सपा के अलावा एक निर्दलीय प्रत्याशी के अलावा अन्य सभी वोटा से पीछे रह गए।
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सामान्य रूप से देखने में आता है कि राजनीतिक दलों द्वारा जनता पर प्रत्याशी थोप दिए जाते हैं। इनमें से कई प्रत्याशी मतदाताओं काे पसंद नहीं आते। ऐसे में अपनी राय जताने के लिए नोटा का विकल्प बेहद महत्वपूर्ण है। - विकास सक्सेना




कोई भी प्रत्याशी पसंद न आने पर तमाम लोग वोट देने के लिए ही नहीं निकलते हैं। लोगों को सोच बदलनी होगी। वोट देने के लिए जरूर पहुंचना है। जिससे राजनीतिक दलों को भी आईना नजर आए। - सुनीत देव वार्ष्णेय
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