{"_id":"624b2b3a61176662b27a9efd","slug":"officers-erected-the-house-on-government-land-etah-news-agr5291322133","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी जमीन पर अफसरों ने खड़ा करा दिया मकान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी जमीन पर अफसरों ने खड़ा करा दिया मकान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। जिला जज आवास के पास सरकारी जमीन पर बनाया गया दो मंजिला मकान तो प्रशासन ने ध्वस्त करा दिया, लेकिन मकान खड़ा कराने में शह अधिकारियों से ही मिली थी। यहां तक कि उस समय लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक ने इस जमीन के सरकारी या नजूल का होने से इनकार कर दिया था। अब इस मामले में जांच शुरू की जा रही है, जिसमें कई अधिकारी फंस सकते हैं।
जिला जज आवास के पास करीब 200 वर्गफुट क्षेत्र में बलवीर सिंह ने मकान बनाया था। प्रशासन ने जमीन को सरकारी बताते हुए रविवार को मकान ध्वस्त करा दिया। मकान निर्माण के लिए जब आवेदन किया गया तो तहसील सदर से रिपोर्ट मांगी गई। जिसमें साफ हो जाता कि जमीन किसी तरह से विवादित तो नहीं है।
लेकिन चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिस जमीन को अब प्रशासन सरकारी बता रहा है, उसी जमीन को 28 जनवरी 2021 में सरकारी व नजूल की होने से मना किया गया था। संबंधित लेखपाल ने इसमें अपनी रिपोर्ट लगाई। जिसे तत्कालीन तहसीलदार ने आगे बढ़ा दिया। इस रिपोर्ट के आधार पर विनियमित क्षेत्र से 7 अप्रैल 2021 को नक्शा पास कर निर्माण के लिए इजाजत भी दे दी गई। प्रशासन को भी इस चूक का अहसास है। ध्वस्तीकरण के रूप में पहली कार्रवाई कर अब यह गलती करने वालों की भूमिका परखी जा रही है।
विज्ञापन
निर्माण अवैध था, जो सरकारी जमीन पर कर लिया गया था। यहां निर्माण की अनुमति कैसे जारी कर दी गई, इस संबंध में जांच शुरू कराई जा रही है। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन
विज्ञापन
जिला जज आवास के पास करीब 200 वर्गफुट क्षेत्र में बलवीर सिंह ने मकान बनाया था। प्रशासन ने जमीन को सरकारी बताते हुए रविवार को मकान ध्वस्त करा दिया। मकान निर्माण के लिए जब आवेदन किया गया तो तहसील सदर से रिपोर्ट मांगी गई। जिसमें साफ हो जाता कि जमीन किसी तरह से विवादित तो नहीं है।
विज्ञापन
लेकिन चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिस जमीन को अब प्रशासन सरकारी बता रहा है, उसी जमीन को 28 जनवरी 2021 में सरकारी व नजूल की होने से मना किया गया था। संबंधित लेखपाल ने इसमें अपनी रिपोर्ट लगाई। जिसे तत्कालीन तहसीलदार ने आगे बढ़ा दिया। इस रिपोर्ट के आधार पर विनियमित क्षेत्र से 7 अप्रैल 2021 को नक्शा पास कर निर्माण के लिए इजाजत भी दे दी गई। प्रशासन को भी इस चूक का अहसास है। ध्वस्तीकरण के रूप में पहली कार्रवाई कर अब यह गलती करने वालों की भूमिका परखी जा रही है।
विज्ञापन
निर्माण अवैध था, जो सरकारी जमीन पर कर लिया गया था। यहां निर्माण की अनुमति कैसे जारी कर दी गई, इस संबंध में जांच शुरू कराई जा रही है। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन