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शिक्षक न छात्र, संस्कृत विद्यालयों में लटके ताले

ब्यूरो अमर उजाला एटा Updated Mon, 06 Apr 2015 12:05 AM IST
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प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2001 में माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद लखनऊ बोर्ड का गठन कर इनमें अध्ययनरत छात्र छात्राओं को एक सौगात के रूप में दिया था, लेकिन 2001 से अब तक इन विद्यालयों में नियुक्तियों के न होने के चलते विद्यालय बंद होते जा रहे हैं। अंकों और शुल्क में छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव के चलते हर साल छात्र संख्या कम हो रही है। छात्रों का कहना है कि इलाहाबाद बोर्ड की तुलना में उनके लिए मानकों में भी भेदभाव किया जा रहा है। परीक्षा शुल्क भी इलाहाबाद बोर्ड से अधिक वसूला जाता है। छात्रों ने इलाहाबाद बोर्ड की तर्ज पर आंतरिक मूल्यांकन के अंक दिलाने की मांग उठाई।
प्रदेश में संस्कृत बोर्ड का गठन करके संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने का प्रयास भले ही किया हो, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति न होने से यह बंद हो चुके हैं। हर साल छात्र संख्या कम होती जा रही है। संस्कृत शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई।



इलाहाबाद बोर्ड का      संस्कृत बोर्ड का      
 परीक्षा शुल्क              परीक्षा शुल्क   
हाईस्कूल       85/-               250/-   
इंटर              91/-               350-


 

यहां शिक्षण शुल्क में छूट, वहां नहीं
इलाहाबाद बोर्ड में शिक्षण शुल्क में छूट है वहीं संस्कृत बोर्ड में शिक्षण शुल्क 10 रुपये प्रतिमाह लगता है। इलाहाबाद बोर्ड में 30 अंक आंतरिक मूल्यांकन के विद्यालय देता है जबकि यह सुविधा संस्कृत बोर्ड में नहीं है जिसके चलते प्रतिशत में इलाहाबाद बोर्ड के छात्र आगे हो जाते हैं।

नौ में से रह गए सात स्कूल
एटा-कासगंज में संस्कृत विद्यालयों की संख्या नौ थी, जिनमें से दो शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने पर बंद हो चुके हैं, शेष बंदी के कगार पर हैं।   


संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति और उसमें अध्ययनरत छात्रों की समस्याओं के लिए प्रयास कर रहे हैं लेकिन सरकार अनदेखी कर रही है।
- देवप्रकाश आर्य, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, माध्यमिक संस्कृत शिक्षक संघ
 

आंतरिक मूल्यांकन 2016 से लागू हो जाएगा। संस्कृत शिक्षा परिषद का शुल्क सरकार द्वारा नहीं दिया जाता है इसलिए छात्रों से कलक्ट किए जाने की व्यवस्था है। संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति संस्कृत निदेशक इलाहाबाद एवं सरकार के बीच क ा मामला है।
- दीपचंद प्रजापति, सचिव माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद

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