{"_id":"3ea9b770012f84c2a9f12f8e147e4134","slug":"night-shelter-people-forced-to-live-without-life-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना रैन बसेरा जिंदगी गुजारने को मजबूर लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना रैन बसेरा जिंदगी गुजारने को मजबूर लोग
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Mon, 14 Dec 2015 09:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोहरे एवं शीत लहर के साथ अब गलन भरी सर्दी का प्रकोप भी बढ़ने लगा है लेकिन रहनुमाओं को अभी तक गरीबों की फिक्र नहीं। पालिका प्रशासन ने नगर में अभी तक न तो रैन बसेरों की व्यवस्था की है और न अलाव की। ऐसे में फुटपाथ पर रहने वाले लोग खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
सोमवार को अधिकतम पारा 20 डिग्री पर रहा तो न्यूनतम पारा 10 डिग्री पर रहा। सुबह से वातावरण में कोहरे की धुंध छाई हुई थी। कोहरे ने सुबह के समय जनजीवन को प्रभावित कर दिया। कोहरे के कारण सर्कुलर रोड पर दृश्यता शून्य रही। वाहन चालक फॉग लाइट लगाकर वाहनों को चलाते दिखे। सुबह टहलने वाले लोग भी घरों से देरी से निकले। स्कूलों में बच्चों की संख्या भी आम दिनों की अपेक्षा कम रही। सबसे ज्यादा परेशानी सड़क किनारे रहने वाले लोगों को हुई। अभी तक पालिका ने उनके लिए कोई रैन बसेरों की व्यवस्था नहीं की है न ही चौराहों पर अलाव इंतजाम किया। गरीब आस लगाए बैठे कि कब उनके लिए रैन बसेरा और अलाव का इंतजाम होगा।
विज्ञापन
सोमवार को अधिकतम पारा 20 डिग्री पर रहा तो न्यूनतम पारा 10 डिग्री पर रहा। सुबह से वातावरण में कोहरे की धुंध छाई हुई थी। कोहरे ने सुबह के समय जनजीवन को प्रभावित कर दिया। कोहरे के कारण सर्कुलर रोड पर दृश्यता शून्य रही। वाहन चालक फॉग लाइट लगाकर वाहनों को चलाते दिखे। सुबह टहलने वाले लोग भी घरों से देरी से निकले। स्कूलों में बच्चों की संख्या भी आम दिनों की अपेक्षा कम रही। सबसे ज्यादा परेशानी सड़क किनारे रहने वाले लोगों को हुई। अभी तक पालिका ने उनके लिए कोई रैन बसेरों की व्यवस्था नहीं की है न ही चौराहों पर अलाव इंतजाम किया। गरीब आस लगाए बैठे कि कब उनके लिए रैन बसेरा और अलाव का इंतजाम होगा।
विज्ञापन