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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etah News ›   Mother... we are also a part of you, we also have the right to live

Etah News: मां...हम भी तेरे अंश, हमें भी है जीने का हक

Mon, 12 Jun 2023 11:29 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Mon, 12 Jun 2023 11:29 PM IST
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Mother... we are also a part of you, we also have the right to live
एटा। बालिका सशक्तीकरण, बेटी बचाओ के नारे और तमाम नियम-कानून। लेकिन बेटियों को बचाने में सब बेअसर बने हुए हैं। कहीं गर्भ में तो कहीं दुनिया में आने के बाद उन्हें फेंक दिया जाता है। बेटियां अपनी चीख में कहती रह जाती हैं, मां...हम भी तेरे अंश, हमें भी जीने का हक है। लेकिन उनकी चीख और दर्द को बेदर्द नहीं समझते।न्यू रैवाड़ी मुहल्ला में जन्म के बाद फेंकी गई बेटी की घटना कोई पहली नहीं है। थाना बागवाला क्षेत्र के गांव नगला दीप में 21 नवंबर 2022 को नवजात बच्ची को खेतों में फेंक दिया गया था। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। इसको ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने मेडिकल कॉलेज में लाकर भर्ती कराया। बच्ची की हालत नाजुक होने की वजह से अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। वहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
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सकरौली थाना क्षेत्र के गांव हंसपुर के पास 13 दिसंबर 2022 की सुबह एक गड्ढे में नवजात बच्ची लोगों को मिली। पुलिस ने बच्ची को पहले सीएचसी चुरथरा और बाद में पीएचसी अवागढ़ पर भर्ती करा दिया। रात के समय उसे यहां छोड़ा गया था। बमुश्किल उसकी जान बचाई जा सकी। बाद में बच्ची को एक पुलिस आरक्षी ने गोद ले लिया।
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बेटी को मारना ही रही होगी मंशा
ताजा मामले में अनुमान लगाया जा रहा है कि बेटी को मारने की मंशा उसके परिजन की रही होगी। यदि वह उसे जिंदा रखना चाहते तो नाले के बजाए किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ते। वहीं यदि बच्ची मृत पैदा हुई होती तो विधिवत रूप से उसका अंतिम संस्कार किया जाता। उसे खुले में नहीं फेंका जाता।
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नहीं बन सके पालना
सरकार ने अस्पतालों में पालना बनाने के निर्देश दिए। ताकि नवजात बच्चों को नहीं पालन के इच्छुक उन्हें इसमें छोड़ सकें। इससे नवजात की जान को खतरा न हो। पालना में किसी नवजात के छोड़े जाने के बाद अस्पताल प्रशासन उसका जरूरी इलाज और देखभाल करता। इसके बाद बाल गृह या गोद लेने के इच्छुकों को नवजात सौंप दिया जाता, लेकिन जिले में पालना आश्रय ही नहीं बने।
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