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प्रदेश भर में मिठास घोल रहा मारहरा का बेर
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मारहरा क्षेत्र में एक बाग में पेड़ पर लगे बेर। संवाद
- फोटो : ETAH
मारहरा। (एटा) विकासखंड क्षेत्र का बेर प्रदेश भर में मिठास घोल रहा है। यह कई मंडियों में पहुंच रहा है। यहां की गोला प्रजाति का बेर अपनी मिठास और खुशबू के लिए काफी मशहूर है। 15 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बागवानी की जा रही है। करीब 150 टन तक पैदावार मिलती है।
बागबानी में मारहरा ने हमेशा परचम लहराया है। आम हो या अमरूद या गुलाबी मौसम में स्वाद देेने वाला बेर, जो उप्र के विभिन्न जिलों में ही नहीं, अन्य प्रदेशों तक में भेजा जाता है। यहां आधा दर्जन प्रजातियों के बेर की बागवानी की जाती है। सबसे खास और महंगी प्रजाति गोला बेर की है, जो देखने में नीबू आकार का होता है। इसके अलावा मुड़िया बेर पूरी तरह पकने के बाद मथुरा के पेड़े का स्वाद देता है। संवाद
इन प्रजातियों की होती है खेती
गोला, मुडिया, चपटा, गेंठा, खट्टा और बताशा की खेती कस्बा में बहुतायत में की जाती है। जिससे बागवानी करने वालों और कारोबारियों को मोटा मुनाफा होता है।
यहां तक भेजे जाते हैं बेर
यूपी के विभिन्न जिलों के अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार प्रांत तक यहां से खास बेर भेजे जाते हैं। स्थानीय मंडी में बेरों का भाव 20 से 30 रुपये किलो मिल रहा है। जबकि बाहर की मंडियों में यह 50 से 100 रुपये किलो तक बिक जाता है। जिसके चलते अधिक मात्रा बाहर की मंडियों में ही भेज दी जाती है।
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बागबानी में मारहरा ने हमेशा परचम लहराया है। आम हो या अमरूद या गुलाबी मौसम में स्वाद देेने वाला बेर, जो उप्र के विभिन्न जिलों में ही नहीं, अन्य प्रदेशों तक में भेजा जाता है। यहां आधा दर्जन प्रजातियों के बेर की बागवानी की जाती है। सबसे खास और महंगी प्रजाति गोला बेर की है, जो देखने में नीबू आकार का होता है। इसके अलावा मुड़िया बेर पूरी तरह पकने के बाद मथुरा के पेड़े का स्वाद देता है। संवाद
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इन प्रजातियों की होती है खेती
गोला, मुडिया, चपटा, गेंठा, खट्टा और बताशा की खेती कस्बा में बहुतायत में की जाती है। जिससे बागवानी करने वालों और कारोबारियों को मोटा मुनाफा होता है।
यहां तक भेजे जाते हैं बेर
यूपी के विभिन्न जिलों के अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार प्रांत तक यहां से खास बेर भेजे जाते हैं। स्थानीय मंडी में बेरों का भाव 20 से 30 रुपये किलो मिल रहा है। जबकि बाहर की मंडियों में यह 50 से 100 रुपये किलो तक बिक जाता है। जिसके चलते अधिक मात्रा बाहर की मंडियों में ही भेज दी जाती है।
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