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Etah News: यू-ट्यूब से सीखा हुनर, एटा में खनकाईं फिरोजाबाद की चूड़ियां
Sat, 10 Jun 2023 11:04 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sat, 10 Jun 2023 11:04 PM IST
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एटा। विषम हालात में छह महीने पहले फिरोजाबाद से यहां आकर रहना पड़ा। ऐसा कोई हुनर नहीं था कि रोजगार कर सकें। ऐसे में हरिओम ने यू-ट्यूब के जरिए चूड़ी का काम सीखा। इसे करने के बाद स्थानीय बाजारों में चूड़ी बेचना शुरू कर दिया। लोगों काे यह पसंद आईं और इनका कारोबार चल पड़ा। अब एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को भी वह रोजगार मुहैया करा रहे हैं।फिरोजाबाद के मोहल्ला राजपुताना में रहने वाले हरिओम बताते हैं कि वहां कारखानों से चूड़ी खरीदकर दुकानों पर बेचने का काम करते थे। अन्य कोई काम न किया और न ही सीखा था। करीब छह महीने पहले कुछ ऐसे हालात बने कि फिरोजाबाद छोड़कर एटा आना पड़ा। यहां शृंगार नगर में किराए पर रहने लगे। लेकिन सबसे बड़ी समस्या रोजगार की थी। चूड़ी के काम में रहे थे, इसलिए अन्य किसी धंधे में लगने का मन नहीं बन पा रहा था। जबकि तैयार चूड़ी को यहां लाकर बेचने में ज्यादा मुनाफा नहीं मिल रहा था।
ऐसे में विचार आया कि कच्चे माल के रूप में चूड़ी को फिरोजाबाद से लेकर आएं और इसकी सजावट, पॉलिश आदि का कार्य यहीं करें। जिससे लागत में कमी आएगी और मुनाफा बढ़ेगा। सीखने के लिए यू-टूयब का सहारा लिया। कई सारे वीडियो देखे और सामान जुटाकर काम शुरू कर दिया। इसमें करीब चार महीने लग गए। इसके बाद दो महीने से अब लगातार चूड़ी तैयार कर स्थानीय बाजारों में बेच रहे हैं। महीने में करीब दस हजार रुपये बच जाते हैं।
इस दौरान कुछ महिलाएं भी हरिओम के संपर्क में आईं। उन्होंने भी चूड़ी तैयार करने का काम सीखा और 10 महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर काम शुरू कर दिया। हरिओम के माध्यम से इनका माल भी बाजारों में पहुंच रहा है। हरिओम बताते हैं कि फिरोजाबाद से सादा कांच की चूड़ियां खरीदकर लाते हैं। फिर यहां केमिकल लगाकर जरी, सफाई आदि काम करने के बाद डिब्बों में पैकिंग कर दी जाती है।
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एटा के लिए नया है काम
भले ही यह पड़ोसी जनपद फिरोजाबाद में बेहद पुराना और मशहूर काम है। जिससे बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। लेकिन एटा के लिए यह बिल्कुल नया है। यहां तैयार चूड़ियों को फिरोजाबाद से बेचा तो जाता है लेकिन चूडि़यां तैयार करने का प्रयोग हरिओम ने किया है।
चूड़ी के काम में महिलाओं का एक समूह लगा हुआ है। विभाग के माध्यम से उन्हें हर संभव सहायता और वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
-ललिता पाठक, पीओ डूडा
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ऐसे में विचार आया कि कच्चे माल के रूप में चूड़ी को फिरोजाबाद से लेकर आएं और इसकी सजावट, पॉलिश आदि का कार्य यहीं करें। जिससे लागत में कमी आएगी और मुनाफा बढ़ेगा। सीखने के लिए यू-टूयब का सहारा लिया। कई सारे वीडियो देखे और सामान जुटाकर काम शुरू कर दिया। इसमें करीब चार महीने लग गए। इसके बाद दो महीने से अब लगातार चूड़ी तैयार कर स्थानीय बाजारों में बेच रहे हैं। महीने में करीब दस हजार रुपये बच जाते हैं।
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इस दौरान कुछ महिलाएं भी हरिओम के संपर्क में आईं। उन्होंने भी चूड़ी तैयार करने का काम सीखा और 10 महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर काम शुरू कर दिया। हरिओम के माध्यम से इनका माल भी बाजारों में पहुंच रहा है। हरिओम बताते हैं कि फिरोजाबाद से सादा कांच की चूड़ियां खरीदकर लाते हैं। फिर यहां केमिकल लगाकर जरी, सफाई आदि काम करने के बाद डिब्बों में पैकिंग कर दी जाती है।
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एटा के लिए नया है काम
भले ही यह पड़ोसी जनपद फिरोजाबाद में बेहद पुराना और मशहूर काम है। जिससे बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। लेकिन एटा के लिए यह बिल्कुल नया है। यहां तैयार चूड़ियों को फिरोजाबाद से बेचा तो जाता है लेकिन चूडि़यां तैयार करने का प्रयोग हरिओम ने किया है।
चूड़ी के काम में महिलाओं का एक समूह लगा हुआ है। विभाग के माध्यम से उन्हें हर संभव सहायता और वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
-ललिता पाठक, पीओ डूडा