{"_id":"697689c429771d780d0de1e8","slug":"karni-senas-attack-against-ugc-warns-the-government-etah-news-c-163-1-eta1002-145455-2026-01-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"एटा : यूजीसी कानून के खिलाफ करणी सेना का हल्ला बोल, सरकार को दी चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एटा : यूजीसी कानून के खिलाफ करणी सेना का हल्ला बोल, सरकार को दी चेतावनी
Mon, 26 Jan 2026 02:53 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 26 Jan 2026 02:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। यूजीसी कानून के मद्देनजर करणी सेना ने रविवार को कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार पर निशाना साधा। कचहरी रोड स्थित होटल पर आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने कानून को वापस लेने की मांग की। जिलाध्यक्ष प्रेम प्रताप सिंह ने कहा कि यह कानून सवर्ण समाज के लिए घातक साबित होगा और इससे शोषण की आशंका बढ़ जाएगी।
जिलाध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सवर्ण समाज के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि सवर्णों को जातिगत संबोधन कर अपमानित किया जाता है, लेकिन इसके खिलाफ अब तक कोई ठोस कानून नहीं बना। इसके विपरीत यूजीसी कानून लाकर सरकार सवर्ण समाज को और निशाने पर ले रही है। प्रेम प्रताप सिंह ने दावा किया कि यह कानून देश के बच्चों के भविष्य के लिए भी उचित नहीं है। कहा कि कॉलेजों और स्कूलों में विशेषज्ञ टीमों के जांच और रेकी की व्यवस्था छात्रों पर दबाव बढ़ाएगी। सवर्ण छात्र-छात्राओं के साथ ब्लैकमेलिंग की घटनाएं बढ़ सकती हैं। यह कानून किसी दलित वर्ग की मांग नहीं है बल्कि सरकार की ओर से थोपे गए निर्णयों में से एक है। करणी सेना का आरोप है कि मोदी सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और ऐसे कदम सत्ता विरोधी माहौल को और तेज करेंगे।
संगठन ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि यूजीसी कानून को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो करणी सेना राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए तैयार है। प्रेस वार्ता में करणी सेना के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिलाध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सवर्ण समाज के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि सवर्णों को जातिगत संबोधन कर अपमानित किया जाता है, लेकिन इसके खिलाफ अब तक कोई ठोस कानून नहीं बना। इसके विपरीत यूजीसी कानून लाकर सरकार सवर्ण समाज को और निशाने पर ले रही है। प्रेम प्रताप सिंह ने दावा किया कि यह कानून देश के बच्चों के भविष्य के लिए भी उचित नहीं है। कहा कि कॉलेजों और स्कूलों में विशेषज्ञ टीमों के जांच और रेकी की व्यवस्था छात्रों पर दबाव बढ़ाएगी। सवर्ण छात्र-छात्राओं के साथ ब्लैकमेलिंग की घटनाएं बढ़ सकती हैं। यह कानून किसी दलित वर्ग की मांग नहीं है बल्कि सरकार की ओर से थोपे गए निर्णयों में से एक है। करणी सेना का आरोप है कि मोदी सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और ऐसे कदम सत्ता विरोधी माहौल को और तेज करेंगे।
विज्ञापन
संगठन ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि यूजीसी कानून को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो करणी सेना राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए तैयार है। प्रेस वार्ता में करणी सेना के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन