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नंदोत्सव में झूमे भक्त
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Fri, 02 Oct 2015 11:37 PM IST
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टीकाराम अग्रवाल धर्मशाला में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन नंदोत्सव, बलि वामन प्रसंग, श्रीरामचरित्र, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं नंदोत्सव की कथा का वर्णन किया गया। श्रद्धालु श्रोताओं ने भक्तिमय भजनों पर जमकर नृत्य किया व श्री कृष्ण जन्म की बधाई दी।
कथा वाचक मृदुल कांत महाराज ने कहा कि शरीर की सफाई से ज्यादा हदय की सफाई जरूरी है क्योंकि जो अपमान का घूंट पीकर भी अपमान करने वाले का सम्मान करना जानता है वास्वत में वह ही इंसान है। संसार रूपी भवसागर में उलहना देने वालों की कमी नहीं लेकिन लोगों की उलाहना सहते हुए जो अपने पथ पर चलता है वह ही अपने असल उद्देश्य को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ने विष का धारण किया और अमृत देवताओं के लिए दे दिया। विष धारण करने के बाद ही उन्हे देवों के देव महादेव की ख्याति मिली। उन्होंने कहा कि त्याग करने वाला मनुष्य महान होता है, जो मनुष्य दूसरों को बांटकर खाता है शास्त्र उसे देवताओं की श्रेणी में रखते है एवं जो व्यक्ति दूसरों का छीन कर खाता है वह राक्षसों की श्रेणी में आता है, इसलिए प्रत्येक मनुष्य को चाहिए कि उसके पास जो है उसमें संतुष्ट रहकर अपना जीवन सुखमय बनाए। कथा के दौरान उन्होंने भगवान वामन, रामचरित्र का भी वर्णन किया। कृष्ण जन्म के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालु भक्तों ने बधाई गीत गाकर कृष्ण जन्म की बधाई दी। नंद के आनंद भयों जय कन्हैया लाल की, कन्हैया झूले पालना नेक होले झोका दीजो सहित अन्य भजनों पर भक्त झूमते नजर आए। कथा वाचक ने कथा के दौरान पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए भक्तों से पॉलीथीन का प्रयोग न करने की भी अपील की। भक्तों को पॉलीथीन का प्रयोग न करने व आसपास के वातावरण को स्वच्छ कर पर्यावरण को शुद्ध रखने का संकल्प भी कथावाचक ने कराया। कथा के दौरान श्याम अग्रवाल, करन, दिलीप, विनय, गौरव, बबलू, विजय अग्रवाल, चंद्रशेखर, अशोक, शुभम, विश्वास नीलमा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथा वाचक मृदुल कांत महाराज ने कहा कि शरीर की सफाई से ज्यादा हदय की सफाई जरूरी है क्योंकि जो अपमान का घूंट पीकर भी अपमान करने वाले का सम्मान करना जानता है वास्वत में वह ही इंसान है। संसार रूपी भवसागर में उलहना देने वालों की कमी नहीं लेकिन लोगों की उलाहना सहते हुए जो अपने पथ पर चलता है वह ही अपने असल उद्देश्य को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ने विष का धारण किया और अमृत देवताओं के लिए दे दिया। विष धारण करने के बाद ही उन्हे देवों के देव महादेव की ख्याति मिली। उन्होंने कहा कि त्याग करने वाला मनुष्य महान होता है, जो मनुष्य दूसरों को बांटकर खाता है शास्त्र उसे देवताओं की श्रेणी में रखते है एवं जो व्यक्ति दूसरों का छीन कर खाता है वह राक्षसों की श्रेणी में आता है, इसलिए प्रत्येक मनुष्य को चाहिए कि उसके पास जो है उसमें संतुष्ट रहकर अपना जीवन सुखमय बनाए। कथा के दौरान उन्होंने भगवान वामन, रामचरित्र का भी वर्णन किया। कृष्ण जन्म के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालु भक्तों ने बधाई गीत गाकर कृष्ण जन्म की बधाई दी। नंद के आनंद भयों जय कन्हैया लाल की, कन्हैया झूले पालना नेक होले झोका दीजो सहित अन्य भजनों पर भक्त झूमते नजर आए। कथा वाचक ने कथा के दौरान पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए भक्तों से पॉलीथीन का प्रयोग न करने की भी अपील की। भक्तों को पॉलीथीन का प्रयोग न करने व आसपास के वातावरण को स्वच्छ कर पर्यावरण को शुद्ध रखने का संकल्प भी कथावाचक ने कराया। कथा के दौरान श्याम अग्रवाल, करन, दिलीप, विनय, गौरव, बबलू, विजय अग्रवाल, चंद्रशेखर, अशोक, शुभम, विश्वास नीलमा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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