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इस्लाम के मायने सलामती है, दहशतगर्दी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Tue, 12 Jul 2016 11:23 PM IST
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इस्लाह ए उम्मत कांफ्रेंस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ऑल इंडिया तहरीक ए इस्लाहे उम्मत की ओर से ग्राम धवा में इस्लाह ए उम्मत कांफ्रेंस हुई। इसमें सामाजिक कुरीतियों के निराकरण व इस्लाम के विचारों से लोगों को रूबरू कराया गया।
हैदराबाद से आए इं. सैयद मुईनुद्दीन ने कहा कि इस्लाम का मतलब सलामती है दहशतगर्दी नहीं। इस्लाम का चोला पहनकर मासूमों का खून करने वाले कोई भी हो सकते हैं,मुसलमान नहीं। दिल्ली से आए मुफ्ती मुनज्जम अजहरी ने कहा कि कुरान व सुन्नत पर अमल से दीन व दुनिया से सभी मसलों हल संभव है। मौलाना आमिर मसूदी ने लोगों को मां-बाप की अहमियत बताई। जावेद अख्तर ने नबी की मोहब्बत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। संयोजक मुफ्ती अशरफ जीलानी ने तालीम पर जोर दिया। नैनीताल से आए जीशान कादरी, अलीगढ़ से सैयद हैदर अली, प्रतापगढ़ से आतिफ रजा हनफी ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में सूफी बुजुर्ग अल्लामा मुफ्ती महमुदुल हसन को इमाम ए आजम अवार्ड से नवाजा गया। मौके पर नदीम फर्रूख, सरताज अली,नदीम हुसैन, सैयद हसनैन, जहीर अहमद, फारूख कुरैशी, इजहार आलम, प्यारे मियां, शब्बू, फैसल कुरैशी, मोहसिन, मुूसा, दानिश शकील अहमद आदि मौजूद रहे। संचालन कारी जुल्फिकार अहमद ने किया।
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हैदराबाद से आए इं. सैयद मुईनुद्दीन ने कहा कि इस्लाम का मतलब सलामती है दहशतगर्दी नहीं। इस्लाम का चोला पहनकर मासूमों का खून करने वाले कोई भी हो सकते हैं,मुसलमान नहीं। दिल्ली से आए मुफ्ती मुनज्जम अजहरी ने कहा कि कुरान व सुन्नत पर अमल से दीन व दुनिया से सभी मसलों हल संभव है। मौलाना आमिर मसूदी ने लोगों को मां-बाप की अहमियत बताई। जावेद अख्तर ने नबी की मोहब्बत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। संयोजक मुफ्ती अशरफ जीलानी ने तालीम पर जोर दिया। नैनीताल से आए जीशान कादरी, अलीगढ़ से सैयद हैदर अली, प्रतापगढ़ से आतिफ रजा हनफी ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में सूफी बुजुर्ग अल्लामा मुफ्ती महमुदुल हसन को इमाम ए आजम अवार्ड से नवाजा गया। मौके पर नदीम फर्रूख, सरताज अली,नदीम हुसैन, सैयद हसनैन, जहीर अहमद, फारूख कुरैशी, इजहार आलम, प्यारे मियां, शब्बू, फैसल कुरैशी, मोहसिन, मुूसा, दानिश शकील अहमद आदि मौजूद रहे। संचालन कारी जुल्फिकार अहमद ने किया।
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