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बुखार के खौफ में कोरोना की तीसरी लहर को न्योता
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ठंडी सड़क स्थित प्राइवेट क्लीनिक पर बाहर तक लगी मरीजों की भीड़। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। बुखार को लेकर लोगों में खौफ बना हुआ है। मेडिकल कॉलेज सहित सीएचसी-पीएचसी की ओपीडी तथा प्राइवेट चिकित्सकों के यहां मरीजों की भीड़ जुट रही है, लेकिन न तो कोई मास्क लगा रहा और न ही सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है। ऐसे में लोग कोरोना की तीसरी लहर को न्योता देते नजर आ रहे हैं।
सोमवार को अमर उजाला टीम ने सरकारी अस्पतालों से लेकर प्राइवेट चिकित्सकों के क्लीनिक और नर्सिंग होम पर पड़ताल की। एक-दो को छोड़ अधिकांश स्थानों पर चिंताजनक स्थिति दिखाई दी। सभी जगह मरीजों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि उनके बीच दो गज तो क्या दो फुट की दूरी बनाना संभव नजर नहीं आ रहा था। अस्पतालों के कर्मचारी भी असहाय नजर आ रहे थे। वहीं लापरवाही बरतते हुए लोग मास्क लगाने को भी तैयार नहीं थे। शहर ही नहीं, देहात क्षेत्रों की भी यही स्थिति नजर आई। सीएचसी-पीएचसी के अलावा देहात में झोलाछापों के यहां हालात अधिक डरावने थे। जिनकी छोटी-छोटी दुकानों और कमरों में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था।
एक भी मरीज हो सकता है बड़ा खतरा
इस समय सबसे अधिक वायरल संक्रमण चल रहा है। इसके लक्षण भी कोरोना संक्रमण से मिलते-जुलते हैं। बिना कोविड की जांच के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मरीजों की कतार में भी बिना सुरक्षा सभी मौजूद रहते हैं। इनमें से एक भी मरीज को कोविड का संक्रमण हुआ तो वह बड़ी संख्या में लोगों के लिए खतरा बन सकता है।
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सोमवार को अमर उजाला टीम ने सरकारी अस्पतालों से लेकर प्राइवेट चिकित्सकों के क्लीनिक और नर्सिंग होम पर पड़ताल की। एक-दो को छोड़ अधिकांश स्थानों पर चिंताजनक स्थिति दिखाई दी। सभी जगह मरीजों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि उनके बीच दो गज तो क्या दो फुट की दूरी बनाना संभव नजर नहीं आ रहा था। अस्पतालों के कर्मचारी भी असहाय नजर आ रहे थे। वहीं लापरवाही बरतते हुए लोग मास्क लगाने को भी तैयार नहीं थे। शहर ही नहीं, देहात क्षेत्रों की भी यही स्थिति नजर आई। सीएचसी-पीएचसी के अलावा देहात में झोलाछापों के यहां हालात अधिक डरावने थे। जिनकी छोटी-छोटी दुकानों और कमरों में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था।
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एक भी मरीज हो सकता है बड़ा खतरा
इस समय सबसे अधिक वायरल संक्रमण चल रहा है। इसके लक्षण भी कोरोना संक्रमण से मिलते-जुलते हैं। बिना कोविड की जांच के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मरीजों की कतार में भी बिना सुरक्षा सभी मौजूद रहते हैं। इनमें से एक भी मरीज को कोविड का संक्रमण हुआ तो वह बड़ी संख्या में लोगों के लिए खतरा बन सकता है।
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