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समूह की महिलाएं देंगी नवजात की सेहत के टिप्स
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एटा। शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए अब प्रसूताओं को जागरूक और प्रशिक्षित करेगी। इसके लिए अब स्वास्थ्य विभाग आजीविका मिशन के समूह की महिलाओं का सहारा लेंगी। समूह की महिलाएं प्रसूताओं को नवजात की देखभाल संबंधी जानकारी देंगी।
शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा लगातार योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके तहत संस्थागत प्रसव पर गर्भवती को धनराशि तक मुहैया कराई जाती है, जिससे उसकी बेहतर देखभाल हो सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग भी समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाता है। हालांकि अब भी जागरूकता के अभाव में शिश मृत्यु दर में कमी नहीं आई है। ऐसे में अब जागरूकता अभियान चलाने के लिए आजीविका मिशन के समूह की महिलाओं का स्वास्थ्य विभाग सहयोग लेगा। समूह की महिलाएं बैठकों के साथ अपने-अपने गांव में माताओं को नवजात की देखरेख संबंधी जानकारी देकर उन्हें सेहत की रखवाली में दक्ष बनाएंगी।
स्तनपान से बढ़ती रोग प्रतिरोधक क्षमता
स्तनपान से निमोनिया में 15 फीसदी और डायरिया में 11 फीसदी की कमी होती है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान न करने वाले शिशु में 33 प्रतिशत रोग की संभावना अधिक रहती है। छह माह तक स्तनपान कराने वाले बच्चे कुशाग्र बुद्धि वाले होते हैं।
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वैभव गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ
महिलाओं को दी जाएगी यह जानकारी।
- जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराएं।
- बच्चे को लगातार छह माह तक केवल स्तनपान कराएं।
- छह माह पूरे होने पर पूरक पोषाहार देना शुरू करें।
- शिशु के दो साल पूरा होने तक स्तनपान कराते रहें।
स्तनपान से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। समूह में महिलाओं की भागीदारी अधिक है। इससे उन्हें भी अभियान में जोड़ा गया है।
आरएन गुप्ता, एसीएमओ
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शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा लगातार योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके तहत संस्थागत प्रसव पर गर्भवती को धनराशि तक मुहैया कराई जाती है, जिससे उसकी बेहतर देखभाल हो सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग भी समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाता है। हालांकि अब भी जागरूकता के अभाव में शिश मृत्यु दर में कमी नहीं आई है। ऐसे में अब जागरूकता अभियान चलाने के लिए आजीविका मिशन के समूह की महिलाओं का स्वास्थ्य विभाग सहयोग लेगा। समूह की महिलाएं बैठकों के साथ अपने-अपने गांव में माताओं को नवजात की देखरेख संबंधी जानकारी देकर उन्हें सेहत की रखवाली में दक्ष बनाएंगी।
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स्तनपान से बढ़ती रोग प्रतिरोधक क्षमता
स्तनपान से निमोनिया में 15 फीसदी और डायरिया में 11 फीसदी की कमी होती है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान न करने वाले शिशु में 33 प्रतिशत रोग की संभावना अधिक रहती है। छह माह तक स्तनपान कराने वाले बच्चे कुशाग्र बुद्धि वाले होते हैं।
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वैभव गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ
महिलाओं को दी जाएगी यह जानकारी।
- जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराएं।
- बच्चे को लगातार छह माह तक केवल स्तनपान कराएं।
- छह माह पूरे होने पर पूरक पोषाहार देना शुरू करें।
- शिशु के दो साल पूरा होने तक स्तनपान कराते रहें।
स्तनपान से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। समूह में महिलाओं की भागीदारी अधिक है। इससे उन्हें भी अभियान में जोड़ा गया है।
आरएन गुप्ता, एसीएमओ