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चार साल में स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिला कोई मुखबिर

Fri, 03 Sep 2021 07:05 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 03 Sep 2021 07:05 PM IST
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Health department did not get any informer in four years
एटा। करीब चार साल में स्वास्थ्य विभाग को कोई मुखबिर नहीं मिला। शासन ने भ्रूण लिंग जांच पकड़ने के लिए मुखबिर बनाने के निर्देश दिए थे। इसमें आम लोगों को साथ जोड़कर अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर स्टिंग ऑपरेशन कराने थे। जुड़ने वाले लोगों को पैसा भी दिया जाता, लेकिन विभाग न मुखबिर ढूंढ़ सका और न आज तक कोई कार्रवाई हो सकी।
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जून 2017 में मुखबिर योजना लागू की गई थी। यूं तो पहले भी सूचना के आधार पर कार्रवाई करने और नकली ग्राहक बनाकर भ्रूण लिंग जांच करने वालों को पकड़े जाने का अधिकार स्वास्थ्य विभाग को था, लेकिन सूचना देने वालों और नकली ग्राहक बनने के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं था। जिसके चलते आम लोग सहयोग देने में रुचि नहीं लेते थे।
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मुखबिर योजना में सही सूचना देने वाले व्यक्ति को 60 हजार, मिथ्या ग्राहक बनने वाली महिला को एक लाख और उसके सहायक को 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया। कुल मिलाकर एक मामले पर सरकार तीन किस्तों में दो लाख रुपये खर्च करती है। विभाग को इसके लिए अधिक से अधिक विश्वस्त मुखबिर बनाने थे, लेकिन योजना के चार साल गुजरने के बाद भी मुखबिर की तलाश है, जो मिले तो भ्रूण लिंग जांच करने वालों के ठिकानों पर कार्रवाई की जा सके।
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