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चौका-चूल्हा छोड़ मतदान को पहुंची आधी आबादी
Amar Ujala
Updated Sun, 12 Feb 2017 12:38 AM IST
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मतदान करने आई युवतियां
- फोटो : Amar Ujala
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कुठिला लायकपुर की ज्ञान देवी, सकीट की इरम आदि तमाम महिलाएं चौका-चूल्हा छोड़कर शनिवार को सबसे पहले बूथ पर पहुंचीं। वोट डाले। मतदान के अधिकार के प्रति यही जागरूकता अबकी आधी आबादी में गांव-गांव देखने को मिला। तभी तो जलेसर, मारहरा, अलीगंज, एटा सभी क्षेत्रों के बूथों पर घूंघट की ओट में महिलाएं की कतारें दिखीं।
एटा की चारों विधानसभा सीट पर शनिवार को मतदान हुआ। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक हुई वोटिंग के दौरान हर बूथ पर आधी आबादी की मौजूदगी दिखी। मारहरा सीट के कुठिला लायकपुर गांव की रहने वाली ज्ञानदेवी ने कहा कि पहले कभी वोट नहीं डाला है। इस बार खूब सुना था कि वोट करो, तो बस मन हुआ और चली आई। गुटलई की गुड्डो देवी ने बताया कि घरवालों के कहने पर उसने भी चौका-चूल्हा छोड़कर इस बार सबसे पहले मतदान किया। उसकी पड़ोसन ज्ञानश्री का कहना था कि पहले वोट को लेकर इतनी जागरूक नहीं थी। इस बार एहसास हुआ कि मतदान करना जरूरी है।
रेनुका देवी का कहना था कि चौका-चूल्हा तो रोज का काम है। वोट डालने का मौका तो पांच साल में एक बार ही आता है। इसी तरह से सकीट की इरम ने बताया कि अभी तक उसके पास वोटर कार्ड बना नहीं था। इस बार बनकर आया, तो उसने मतदान भी किया। नाजरीन का कहना था कि काफी दिन से मतदान का शोर था। इस बार जागरूकता कार्यक्रम हुए, तो उसे मतदान करने की अहमियत का पता चला।
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एटा की चारों विधानसभा सीट पर शनिवार को मतदान हुआ। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक हुई वोटिंग के दौरान हर बूथ पर आधी आबादी की मौजूदगी दिखी। मारहरा सीट के कुठिला लायकपुर गांव की रहने वाली ज्ञानदेवी ने कहा कि पहले कभी वोट नहीं डाला है। इस बार खूब सुना था कि वोट करो, तो बस मन हुआ और चली आई। गुटलई की गुड्डो देवी ने बताया कि घरवालों के कहने पर उसने भी चौका-चूल्हा छोड़कर इस बार सबसे पहले मतदान किया। उसकी पड़ोसन ज्ञानश्री का कहना था कि पहले वोट को लेकर इतनी जागरूक नहीं थी। इस बार एहसास हुआ कि मतदान करना जरूरी है।
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रेनुका देवी का कहना था कि चौका-चूल्हा तो रोज का काम है। वोट डालने का मौका तो पांच साल में एक बार ही आता है। इसी तरह से सकीट की इरम ने बताया कि अभी तक उसके पास वोटर कार्ड बना नहीं था। इस बार बनकर आया, तो उसने मतदान भी किया। नाजरीन का कहना था कि काफी दिन से मतदान का शोर था। इस बार जागरूकता कार्यक्रम हुए, तो उसे मतदान करने की अहमियत का पता चला।
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