हाईकोर्ट : पुरानी रंजिश में हुई फायरिंग को डकैती नहीं माना जा सकता, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुरानी रंजिश के चलते हुई फायरिंग और हत्या को डकैती नहीं माना जा सकता। घटना के बाद किसी मृतक की बंदूक और कारतूस की पेटी ले जाना डकैती का आधार नहीं हो सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुरानी रंजिश के चलते हुई फायरिंग और हत्या को डकैती नहीं माना जा सकता। घटना के बाद किसी मृतक की बंदूक और कारतूस की पेटी ले जाना डकैती का आधार नहीं हो सकता। अभियोजन को यह साबित करना जरूरी है कि हत्या से पहले पांच या अधिक लोगों का डकैती करने का इरादा था और हत्या उसी डकैती के दौरान की गई। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने डकैती सहित हत्या मामले में दोषी ठहराए गए अपीलकर्ता को बरी कर दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने एटा निवासी कृष्ण पाल व अन्य की अपील पर दिया है। एटा निवासी अपीलकर्ता व अन्य के खिलाफ दिसंबर 1981 में एफआईआर दर्ज की गई थी। अभियोजन के अनुसार अतर सिंह व अन्य गांव की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान महावीर अपने साथियों के साथ मिला और पुरानी दुश्मनी के चलते अतर सिंह को चुनौती देकर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद दोनों ओर से फायरिंग हुई और अतर सिंह की मौत हो गई।
घटना के बाद एक आरोपी ने अतर सिंह की बंदूक और कारतूस की पेटी उठा ले गया। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने दो नवंबर 1982 को सभी आरोपियों को डकैती सहित हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई थी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अपील अब केवल आरोपी सत्तू के संबंध में विचाराधीन थी। अन्य अपीलकर्ताओं की मृत्यु होने से उनकी अपील समाप्त हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन की कहानी से स्पष्ट है कि दोनों पक्षों की मुलाकात अचानक हुई थी और फायरिंग पुरानी दुश्मनी के कारण शुरू हुई। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था, जिससे यह साबित हो कि आरोपियों का पहला इरादा डकैती करना था। इस मामले में डकैती का इरादा साबित नहीं हो सका। इसलिए हाईकोर्ट ने सत्तू को सभी आरोपों से बरी कर दिया।