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हड़ताल से बिगड़ी बीमारों की हालत
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Sat, 10 Sep 2016 11:58 PM IST
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संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी है। आकस्मिक चिकित्सा सेवाएं ठप होने से मरीजों और उनके तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है। आलम यह है कि जिला अस्पताल से अधिकतर मरीजों को आगरा और अलीगढ़ रेफर किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में सीएचसी-पीएचसी में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले चार दिनों से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते चिकित्सा व्यवस्था पटरी से उतर गई है। हालात यह हैं कि डाक्टरों के अभाव में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में बनी सीएचसी और पीएचसी पर भी डाक्टर और कर्मचारी न होने से ग्रामीणों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। अधिकतर ग्रामीण इलाज के लिए निजी चिकित्सकों और झोलाछापों पर निर्भर हैं। ऐसे में चिकित्सा सुविधाओं पर प्रभाव पड़ रहा है। शनिवार को भी आकस्मिक चिकित्सा केंद्र के वार्ड में बेड खाली पड़े रहे। उधर, सविंदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन किया। डा. आरपी सिंह ने कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित किया जाए। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया को बंद किया जाए। अतुल कुमार, शैलेष यादव, डा. पंकज, सरिता, रीना, डा. केके गुप्ता, सचिन कुमार, योगेश, नीरज, धर्मेंद्र शाक्य, राजीव दीक्षित, विजय पाठक, लालाराम यादव, डा. प्रेरणा यादव, कुसुमलता मौजूद रहे।
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निजी चिकित्सकों के यहां लगी भीड़
हड़ताल के चलते निजी चिकित्सकों के क्लीनिकों पर भीड़ लग रही है। मलेरिया और वायरल का कहर होने के चलते मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। मगर, हड़ताल को देखते हुए मरीज मायूस होकर लौटते हैं। ऐसे में निजी चिकित्सक ही मरीजों के पास एकमात्र सहारा होते हैं।
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मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले चार दिनों से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते चिकित्सा व्यवस्था पटरी से उतर गई है। हालात यह हैं कि डाक्टरों के अभाव में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में बनी सीएचसी और पीएचसी पर भी डाक्टर और कर्मचारी न होने से ग्रामीणों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। अधिकतर ग्रामीण इलाज के लिए निजी चिकित्सकों और झोलाछापों पर निर्भर हैं। ऐसे में चिकित्सा सुविधाओं पर प्रभाव पड़ रहा है। शनिवार को भी आकस्मिक चिकित्सा केंद्र के वार्ड में बेड खाली पड़े रहे। उधर, सविंदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन किया। डा. आरपी सिंह ने कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित किया जाए। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया को बंद किया जाए। अतुल कुमार, शैलेष यादव, डा. पंकज, सरिता, रीना, डा. केके गुप्ता, सचिन कुमार, योगेश, नीरज, धर्मेंद्र शाक्य, राजीव दीक्षित, विजय पाठक, लालाराम यादव, डा. प्रेरणा यादव, कुसुमलता मौजूद रहे।
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निजी चिकित्सकों के यहां लगी भीड़
हड़ताल के चलते निजी चिकित्सकों के क्लीनिकों पर भीड़ लग रही है। मलेरिया और वायरल का कहर होने के चलते मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। मगर, हड़ताल को देखते हुए मरीज मायूस होकर लौटते हैं। ऐसे में निजी चिकित्सक ही मरीजों के पास एकमात्र सहारा होते हैं।
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