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शिलाफलकम् का खेल: खर्च हो गए 15 से 30 हजार, सूने पड़े हैं प्लेटफॉर्म
Fri, 09 Feb 2024 05:40 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 09 Feb 2024 05:40 PM IST
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एटा। मेरी माटी मेरा देश अभियान के तहत शिलाफलकम् (स्मारक) में जमकर खेल हुआ है। एक ओर जहां ग्रेनाइट पटिया मानक के अनुसार नहीं लगाई गईं। वहीं दूसरी ओर कई जगह तो पटिया लगी तक नहीं। जबकि उन्हें लगाने के लिए फाउंडेशन (प्लेटफॉर्म) तैयार करने में 10 से लेकर 40 हजार रुपये खर्च किए गए जो सूने पड़े हुए हैं।
स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में आदेश जारी किया था। इसके तहत हर ग्राम पंचायत में एक स्मारक तैयार किया जाना था। इसमें प्रधानमंत्री के संदेश के साथ ही गांव की पहचान के रूप में ब्योरा दर्ज किया जाना था। इसके लिए निर्देश दिए गए कि ग्रेनाइट की पटिया पर इस ब्योरे को गुदवाकर अंकित कराया जाए। लेकिन इन्हें लगवाते समय यहां काफी हीलाहवाली बरती गई। कई जगह पटियों पर केवल स्टीकर चिपका दिए गए जो कुछ दिन में छूटकर अलग हो गए और खाली पटिया लगी रह गईं।
वहीं तमाम जगह तो हद दर्ज की लापरवाही बरतते हुए स्टीकर दीवारों पर लगा दिए गए। पटिया ही नहीं लगाई गई। जबकि इसे लगाने के लिए हर ग्राम पंचायत में 10 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक फाउंडेशन बनवाने में खर्च कर दिए गए। स्टीकर छूट गए और अब ये फाउंडेशन खाली पड़े हैं। जिसमें सरकारी धन की बर्बादी हो गई। इसे लेकर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
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मामला जानकारी में आ चुका है, इसकी जांच कराई जाएगी जो भी इस प्रकरण में दोषी मिलेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - प्रेम रंजन सिंह, डीएम
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स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में आदेश जारी किया था। इसके तहत हर ग्राम पंचायत में एक स्मारक तैयार किया जाना था। इसमें प्रधानमंत्री के संदेश के साथ ही गांव की पहचान के रूप में ब्योरा दर्ज किया जाना था। इसके लिए निर्देश दिए गए कि ग्रेनाइट की पटिया पर इस ब्योरे को गुदवाकर अंकित कराया जाए। लेकिन इन्हें लगवाते समय यहां काफी हीलाहवाली बरती गई। कई जगह पटियों पर केवल स्टीकर चिपका दिए गए जो कुछ दिन में छूटकर अलग हो गए और खाली पटिया लगी रह गईं।
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वहीं तमाम जगह तो हद दर्ज की लापरवाही बरतते हुए स्टीकर दीवारों पर लगा दिए गए। पटिया ही नहीं लगाई गई। जबकि इसे लगाने के लिए हर ग्राम पंचायत में 10 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक फाउंडेशन बनवाने में खर्च कर दिए गए। स्टीकर छूट गए और अब ये फाउंडेशन खाली पड़े हैं। जिसमें सरकारी धन की बर्बादी हो गई। इसे लेकर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
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मामला जानकारी में आ चुका है, इसकी जांच कराई जाएगी जो भी इस प्रकरण में दोषी मिलेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - प्रेम रंजन सिंह, डीएम

धीरेंद्र गिरि का फाइल फोटो। स्रोत परिवार