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बुखारः पीडियाट्रिक वार्ड में कम पड़े बेड
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में लगी मरीजों की कतारें। संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। बुखार के रोगियों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को मेडिकल कॉलेज रोगियों से भर गया। पीडियाट्रिक वार्ड में बेड कम पड़ गए। पुरानी से लेकर नई बिल्डिंग में मरीजों की कतारें दोपहर तक लगी रहीं। कुल 1785 नए पर्चे बने। जबकि बड़ी संख्या में पुराने पर्चे लेकर भी मरीज पहुंचे। उधर, सीबीसी जांच न होने के कारण लोग चक्कर काटते रहे।
ओपीडी खुलने के कुछ ही समय बाद भीड़ का दबाव बढ़ना शुरू हो गया। इसमें मौजूद स्थायी और संविदा चिकित्सकों के चैंबर के बाहर मरीजों की लंबी-लंबी कतारें थीं। सबसे अधिक मरीज बुखार के थे। मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉ. अरुण उपाध्याय ने बताया कि इस समय अस्पताल में 80 फीसदी मरीज बुखार पीड़ित आ रहे हैं। इनमें अधिकांश को वायरल बुखार है। उधर, मैटरनिटी विंग में बनाए गए पीडियाट्रिक वार्ड के सभी बेड फुल हो गए।
इसके बाद भर्ती कराए गए डेंगू के लक्षण वाले मयंक (10) पुत्र रवेंद्र सिंह निवासी रुरियां ब्लॉक शीतलपुर को सामान्य डेंगू वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा। इस पर सीएमएस डॉ. अशोक कुमार का कहना था कि पीडियाट्रिक वार्ड का विस्तार करने की अभी कोई योजना नहीं है। अन्य वार्ड में हमारे पास बेड पर्याप्त हैं। जहां मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जाएगा। उधर, पैथोलॉजी लैब में सोमवार को भी एक मशीन सही नहीं हो पाई, जिससे सीबीसी जांचें नहीं हुईं। डेंगू के मामलों में इसी जांच के जरिए सबसे महत्वपूर्ण प्लेटलेट्स काउंट कराई जाती हैं। ऐसे में मरीजों को यह जांच कराने के लिए प्रावइेट पैथोलॉजी लैब पर भटकना पड़ा।
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प्राचार्य, सीएमओ ने किया निरीक्षण
सुबह के समय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश गुप्ता और सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने मैटरनिटी विंग का निरीक्षण किया। रात में वार्ड ब्यॉय के अनुपस्थित रहने की शिकायत पर कर्मचारियों को चेतावनी दी। वहीं मरीजों का हर संभव इलाज स्थानीय स्तर पर करने की बात कहते हुए कहा कि बहुत गंभीर स्थिति और यहां इलाज की सुविधा न होने पर ही मरीज को रेफर किया जाए।
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ओपीडी खुलने के कुछ ही समय बाद भीड़ का दबाव बढ़ना शुरू हो गया। इसमें मौजूद स्थायी और संविदा चिकित्सकों के चैंबर के बाहर मरीजों की लंबी-लंबी कतारें थीं। सबसे अधिक मरीज बुखार के थे। मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉ. अरुण उपाध्याय ने बताया कि इस समय अस्पताल में 80 फीसदी मरीज बुखार पीड़ित आ रहे हैं। इनमें अधिकांश को वायरल बुखार है। उधर, मैटरनिटी विंग में बनाए गए पीडियाट्रिक वार्ड के सभी बेड फुल हो गए।
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इसके बाद भर्ती कराए गए डेंगू के लक्षण वाले मयंक (10) पुत्र रवेंद्र सिंह निवासी रुरियां ब्लॉक शीतलपुर को सामान्य डेंगू वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा। इस पर सीएमएस डॉ. अशोक कुमार का कहना था कि पीडियाट्रिक वार्ड का विस्तार करने की अभी कोई योजना नहीं है। अन्य वार्ड में हमारे पास बेड पर्याप्त हैं। जहां मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जाएगा। उधर, पैथोलॉजी लैब में सोमवार को भी एक मशीन सही नहीं हो पाई, जिससे सीबीसी जांचें नहीं हुईं। डेंगू के मामलों में इसी जांच के जरिए सबसे महत्वपूर्ण प्लेटलेट्स काउंट कराई जाती हैं। ऐसे में मरीजों को यह जांच कराने के लिए प्रावइेट पैथोलॉजी लैब पर भटकना पड़ा।
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प्राचार्य, सीएमओ ने किया निरीक्षण
सुबह के समय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश गुप्ता और सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने मैटरनिटी विंग का निरीक्षण किया। रात में वार्ड ब्यॉय के अनुपस्थित रहने की शिकायत पर कर्मचारियों को चेतावनी दी। वहीं मरीजों का हर संभव इलाज स्थानीय स्तर पर करने की बात कहते हुए कहा कि बहुत गंभीर स्थिति और यहां इलाज की सुविधा न होने पर ही मरीज को रेफर किया जाए।