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किसानों की उम्मीद को बिजली का झटका
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sat, 02 May 2015 11:03 PM IST
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रबी की फसल में बर्बाद हुए किसानों के आंसू जायद की फसल से भी नहीं रुकते दिखाई दे रहे हैं। अभी जायद की फसल के लिए भी मौसम अनुकूल नहीं हो रहा है। हर दिन चढ़ रहे पारे और बिजली अव्यवस्था से किसानों के सामने फसल को सींचने का संकट आ रहा है। अब किसानों का दर्द है कि यदि जायद की फसल की भी पैदावार ठीक तरह से नहीं ले पाए तो कर्ज में डूब जाएंगे और उन्हें अपना घर चलाना भी मुश्किल हो जाएगा। शासन की मुआवजा राशि भी उनके जख्मों पर मरहम नहीं लगा पाई है।
बीता एक साल किसानों के लिए अच्छा नहीं रहा है। पहले खरीफ फसल बरसात न होने की वजह से बर्बाद हो गई, बाद में रबी की फसल अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई। दोनों फसलों के बर्बाद होने के बाद अब किसानों की उम्मीदें जायद फसल पर थी, उसे भी बरसात ने अपनी चपेट में ले लिया। मार्च-अप्रैल में बोई गईं जायद की फसल पहले से ही ओलावृष्टि की वजह से प्रभावित हो गई थी, अब बची फसल के लिए भी मौसम प्रतिकूल है। प्रतिकूल रहने से सब्जी की फसलें प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा दिन प्रतिदिन पारा चढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई भी रोस्टर के हिसाब से नहीं मिल पा रही है। इससे मक्का, टमाटर, खरबूज, तरबूज आदि फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बता दें कि जिले में इस बार जायद फसल के लिए 34452 हेक्टेयर का आच्छादन क्षेत्र कवर किया गया है। जो पिछले वर्ष के आच्छादन क्षेत्र से कुछ प्रतिशत ही बढ़ा है।
जायद का निर्धारित आच्छादन क्षेत्र
फसल लक्ष्य
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बाजरा 5000 हेक्टेयर
मक्का 4405 हेक्टेयर
मूंग 12000 हेक्टेयर
उर्द 700 हेक्टेयर
मूंगफली 26 हेक्टेयर
मैंथा (पिपरमेंट) 232 हेक्टेयर
सब्जी 7480 हेक्टेयर
हरा चारा 2520 हेक्टेयर
विभाग की ओर से कराई गई क्रॉप कटिंग में गेहूं की पैदावार 50 प्रतिशत तक प्रभावित रही है। उनके अनुसार कृषि फार्म की क्रॉप कटिंग में खड़ी हुई गेहूं की पैदावार 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर निकली है, जबकि गत वर्ष गेहूं की पैदावार 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी। इसके अलावा गिरी हुई गेहूं की फसल में औसतन पैदावार 20 क्विंटल रही है। कृषि विभाग भी फार्म हाउस की पैदावार से किसानों की पैदावार को कम आक रहा है।
जिला कृषि अधिकारी, डा. सर्वेश यादव
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बीता एक साल किसानों के लिए अच्छा नहीं रहा है। पहले खरीफ फसल बरसात न होने की वजह से बर्बाद हो गई, बाद में रबी की फसल अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई। दोनों फसलों के बर्बाद होने के बाद अब किसानों की उम्मीदें जायद फसल पर थी, उसे भी बरसात ने अपनी चपेट में ले लिया। मार्च-अप्रैल में बोई गईं जायद की फसल पहले से ही ओलावृष्टि की वजह से प्रभावित हो गई थी, अब बची फसल के लिए भी मौसम प्रतिकूल है। प्रतिकूल रहने से सब्जी की फसलें प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा दिन प्रतिदिन पारा चढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई भी रोस्टर के हिसाब से नहीं मिल पा रही है। इससे मक्का, टमाटर, खरबूज, तरबूज आदि फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बता दें कि जिले में इस बार जायद फसल के लिए 34452 हेक्टेयर का आच्छादन क्षेत्र कवर किया गया है। जो पिछले वर्ष के आच्छादन क्षेत्र से कुछ प्रतिशत ही बढ़ा है।
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जायद का निर्धारित आच्छादन क्षेत्र
फसल लक्ष्य
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बाजरा 5000 हेक्टेयर
मक्का 4405 हेक्टेयर
मूंग 12000 हेक्टेयर
उर्द 700 हेक्टेयर
मूंगफली 26 हेक्टेयर
मैंथा (पिपरमेंट) 232 हेक्टेयर
सब्जी 7480 हेक्टेयर
हरा चारा 2520 हेक्टेयर
विभाग की ओर से कराई गई क्रॉप कटिंग में गेहूं की पैदावार 50 प्रतिशत तक प्रभावित रही है। उनके अनुसार कृषि फार्म की क्रॉप कटिंग में खड़ी हुई गेहूं की पैदावार 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर निकली है, जबकि गत वर्ष गेहूं की पैदावार 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी। इसके अलावा गिरी हुई गेहूं की फसल में औसतन पैदावार 20 क्विंटल रही है। कृषि विभाग भी फार्म हाउस की पैदावार से किसानों की पैदावार को कम आक रहा है।
जिला कृषि अधिकारी, डा. सर्वेश यादव