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जिंदा और मौत के बीच में उलझे परिजन, इमरजेंसी में चला इलाज
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एटा। मारहरा थाना क्षेत्र के गांव नगला पुढ़िहार निवासी सोनू के परिजन उसके जीवन और मौत की संभावनाओं के बीच पांच घंटे उलझे रहे। सोनू के साले शिवम यादव ने बताया कि परिजन पीएसी के पास हादसे में घायल सोनू को लेकर मंगलवार शाम मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उसे गंभीर स्थिति में आगरा रेफर किया गया। यहां से शहर के ही एक प्राइवेट हॉस्पीटल में ले गए। बुधवार सुबह करीब नौ बजे हॉस्पीटल के चिकित्सकों ने हालत अधिक गंभीर बता अन्य कहीं ले जाने की बात कही। लेकिन सोनू के शरीर में कोई हरकत नहीं थी। परिजन मृत समझकर दोपहर करीब 12 बजे पोस्टमार्टम हाउस ले आए। जहां उनका दिल धड़क रहा था। कहा कि दिल धड़कने पर वह इमरजेंसी में लेकर गए। वाहन से उतारकर उन्हें स्ट्रेचर पर रखवा दिया गया। इस दौरान शरीर में कुछ हरकत दिखाई दी तो परिजन जिंदा मानकर इमरजेंसी वार्ड में ले गए। जहां चिकित्सकों द्वारा इलाज किया गया, लेकिन पल्स न होने की बात कही और मृत बता दिया। इसके बावजूद परिजन शहर के एक निजी हॉस्पीटल में ले गए। वहां भी चिकित्सक ने मृत बता दिया। करीब 2 बजे वापस पोस्टमार्टम हाउस पर ले आए।
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मरीज के सेंसर लाइन (नली) पड़ी होने पर उसमें पंपिंग करने पर शरीर के अंदर हवा जाती है। कभी-कभी मृत व्यक्तियों में भी इस पंपिंग की वजह से हलचल हो जाती है। संभवत: इस केस में भी ऐसा ही कुछ रहा होगा। पल्स न होने पर जीवित नहीं रह सकता।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमएस
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मरीज के सेंसर लाइन (नली) पड़ी होने पर उसमें पंपिंग करने पर शरीर के अंदर हवा जाती है। कभी-कभी मृत व्यक्तियों में भी इस पंपिंग की वजह से हलचल हो जाती है। संभवत: इस केस में भी ऐसा ही कुछ रहा होगा। पल्स न होने पर जीवित नहीं रह सकता।
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- डॉ. अशोक कुमार, सीएमएस