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फर्जी लाइसेंस मामला : शस्त्र लिपिकों के जवाब मिले, आगे बढ़ेगी जांच
Tue, 29 Jul 2025 05:47 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 29 Jul 2025 05:47 PM IST
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एटा। फर्जी लाइसेंस मामले में एक ओर जहां गुजरात एटीएस जांच कर रही है। वहीं दूसरी जांच स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन भी कर रहा है। जिस अवधि में शस्त्र लाइसेंस बने उस अंतराल के शस्त्र लिपिकों के जवाब मांगे गए थे। ये प्राप्त हो गए हैं अब इनके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
गुजरात की एटीएस ने अहमदाबाद में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाला गिरोह पकड़ा था। एटा के पते पर 12 शस्त्र लाइसेंस पाए गए। इनमें दो आरोपी एटा के हैं। शस्त्र लाइसेंस न सिर्फ फर्जी रूप से ऑनलाइन दर्ज करा लिए गए बल्कि निर्धारित समय पर इनका नवीनीकरण भी ऑनलाइन किया जाता रहा और स्थानीय प्रशासन को भनक तक नहीं लगी।
यह गिरोह गुजरात के लोगों को शस्त्र लाइसेंस बनवाकर देने के लिए मोटी रकम लेता था। उनसे तो रकम पूरी ले जाती थी लेकिन हेराफेरी कर फर्जी लाइसेंस बनाकर दे दिए जाते थे। जब एटीएस टीम यहां पड़ताल करने पहुंची तो दर्शाए गए लाइसेंस नंबरों पर अन्य लोगों के लाइसेंस का ब्योरा दर्ज था। गुजरात के लोगों के नाम-पते कहीं नहीं मिले।
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बनाए गए 10 शस्त्र लाइसेंस 2015-16 और 2019 के हैं। 2015-16 में ही सभी ऑफलाइन शस्त्र लाइसेंसों की ऑनलाइन फीडिंग कराई गई थी। जिला प्रशासन ने 2015-16 और 2019 में तैनात रहे शस्त्र लिपिकों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा। एडीएम प्रशासन सत्यप्रकाश ने बताया कि लिपिकों के जवाब मिल गए हैं। पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। जिस स्तर से चूक सामने आएगी, दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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गुजरात की एटीएस ने अहमदाबाद में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाला गिरोह पकड़ा था। एटा के पते पर 12 शस्त्र लाइसेंस पाए गए। इनमें दो आरोपी एटा के हैं। शस्त्र लाइसेंस न सिर्फ फर्जी रूप से ऑनलाइन दर्ज करा लिए गए बल्कि निर्धारित समय पर इनका नवीनीकरण भी ऑनलाइन किया जाता रहा और स्थानीय प्रशासन को भनक तक नहीं लगी।
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यह गिरोह गुजरात के लोगों को शस्त्र लाइसेंस बनवाकर देने के लिए मोटी रकम लेता था। उनसे तो रकम पूरी ले जाती थी लेकिन हेराफेरी कर फर्जी लाइसेंस बनाकर दे दिए जाते थे। जब एटीएस टीम यहां पड़ताल करने पहुंची तो दर्शाए गए लाइसेंस नंबरों पर अन्य लोगों के लाइसेंस का ब्योरा दर्ज था। गुजरात के लोगों के नाम-पते कहीं नहीं मिले।
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बनाए गए 10 शस्त्र लाइसेंस 2015-16 और 2019 के हैं। 2015-16 में ही सभी ऑफलाइन शस्त्र लाइसेंसों की ऑनलाइन फीडिंग कराई गई थी। जिला प्रशासन ने 2015-16 और 2019 में तैनात रहे शस्त्र लिपिकों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा। एडीएम प्रशासन सत्यप्रकाश ने बताया कि लिपिकों के जवाब मिल गए हैं। पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। जिस स्तर से चूक सामने आएगी, दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।