{"_id":"628a72708e39ac59e32641ab","slug":"every-time-the-track-traders-are-victims-of-encroachment-campaign-etah-news-agr5343324191","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर बार पटरी व्यापारी अतिक्रमण अभियान के शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर बार पटरी व्यापारी अतिक्रमण अभियान के शिकार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। अतिक्रमण की बात चलती है तो कार्रवाई के नाम पर हर बार अभियान में पटरी व्यापारियों को उजाड़ दिया जाता है, लेकिन उनके पुनर्वासन को लेकर जिम्मेदार अभी तक योजना नहीं बना सके। जिससे उन्हें व्यापार के लिए कोई तय ठिकाना दिया जा सके। पांच साल से वेंडिंग जोन बनाने की प्रक्रिया कागजों में ही उलझी हुई है।
2017 में शासन ने उप्र पथ विक्रेता नियमावली लागू की थी। इसमें नगरीय इलाकों में वेंडिंग जोन बनाकर पथ विक्रेताओं को स्थान दिया जाना था। जहां वह अधिकृत रूप से अपना व्यापार कर सकें। जबकि भीड़भाड़ वाले और अधिक यातायात वाले स्थानों को नॉन वेंडिंग जोन के रूप में घोषित करना था। यहां पथ विक्रेताओं द्वारा व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित रहता। नियमावली के प्रावधान लागू कराने के लिए पालिका में एक समिति का गठन भी किया गया। जिसे वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन का प्रस्ताव बनाना था। इस प्रस्ताव को पालिका बोर्ड की बैठक में पास कर क्रियान्वयन कराना था, लेकिन क्रियान्वयन तो दूर, प्रस्ताव ही नहीं बन पाया।
दुकानों के आगे होती है वसूली
ऐसा नहीं है कि हथठेल, फड़ वाले सड़क किनारे मुफ्त में व्यापार करते हैं, इसके लिए भी उनसे वसूली की जाती है। नाम न छापने की शर्त पर एक चाट विक्रेता ने बताया कि एक पक्की दुकान के सामने ठेल लगाते हैं। इसके लिए रोजाना दुकान स्वामी को 200 रुपये देते हैं। अन्य हथठेल वालों का भी यही हाल है।
विज्ञापन
विज्ञापन
2017 में शासन ने उप्र पथ विक्रेता नियमावली लागू की थी। इसमें नगरीय इलाकों में वेंडिंग जोन बनाकर पथ विक्रेताओं को स्थान दिया जाना था। जहां वह अधिकृत रूप से अपना व्यापार कर सकें। जबकि भीड़भाड़ वाले और अधिक यातायात वाले स्थानों को नॉन वेंडिंग जोन के रूप में घोषित करना था। यहां पथ विक्रेताओं द्वारा व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित रहता। नियमावली के प्रावधान लागू कराने के लिए पालिका में एक समिति का गठन भी किया गया। जिसे वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन का प्रस्ताव बनाना था। इस प्रस्ताव को पालिका बोर्ड की बैठक में पास कर क्रियान्वयन कराना था, लेकिन क्रियान्वयन तो दूर, प्रस्ताव ही नहीं बन पाया।
विज्ञापन
दुकानों के आगे होती है वसूली
ऐसा नहीं है कि हथठेल, फड़ वाले सड़क किनारे मुफ्त में व्यापार करते हैं, इसके लिए भी उनसे वसूली की जाती है। नाम न छापने की शर्त पर एक चाट विक्रेता ने बताया कि एक पक्की दुकान के सामने ठेल लगाते हैं। इसके लिए रोजाना दुकान स्वामी को 200 रुपये देते हैं। अन्य हथठेल वालों का भी यही हाल है।
विज्ञापन