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दवा विक्रेताओं की हड़ताल
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Wed, 16 Dec 2015 11:18 PM IST
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शहर के दवा विक्रेता बुधवार को अपनी कई मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। भारतीय दवा उद्योग में अमेरिकी हस्तक्षेप को बंद करने और आनलाइन दवा की बिक्री को खत्म करने की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।
जिलाध्यक्ष शैलेंद्र गौर ने बताया कि केंद्र सरकार को यूएसएफडीए के सभी दफ्तरों को बंद करने के साथ-साथ भारतीय दवा उद्योग में सौ प्रतिशत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के निर्णय को भी वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को ध्यान में रखते हुए दवाओं के लागत मूल्य पर उत्पाद शुल्क लगाना चाहिए, जो कि अभी खुदरा मूल्य पर लग रहा है। सरकार को दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगानी चाहिए। जीवन रक्षक दवाओं पर उत्पाद शुल्क और टैक्स भी कम करना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार से मांग की, सेल्स प्रमोशन एंप्लाइज एक्ट का पालन कराया जाए और न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये घोषित करते हुए मेडिकल रिप्रजंटेटिव को सरकारी अस्पतालों में काम करने पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए। इस मौके पर सचिव प्रंशात, सुनहरी लाल शर्मा, शिवप्रताप सिंह, विवेक तिवारी, मनोज राठौर, पंकज राठौर, सतेंद्र यादव, सुधीर राघव, शैलेंद्र सोलंकी, नवीन सिंह आदि मौजूद थे।
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जिलाध्यक्ष शैलेंद्र गौर ने बताया कि केंद्र सरकार को यूएसएफडीए के सभी दफ्तरों को बंद करने के साथ-साथ भारतीय दवा उद्योग में सौ प्रतिशत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के निर्णय को भी वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को ध्यान में रखते हुए दवाओं के लागत मूल्य पर उत्पाद शुल्क लगाना चाहिए, जो कि अभी खुदरा मूल्य पर लग रहा है। सरकार को दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगानी चाहिए। जीवन रक्षक दवाओं पर उत्पाद शुल्क और टैक्स भी कम करना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार से मांग की, सेल्स प्रमोशन एंप्लाइज एक्ट का पालन कराया जाए और न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये घोषित करते हुए मेडिकल रिप्रजंटेटिव को सरकारी अस्पतालों में काम करने पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए। इस मौके पर सचिव प्रंशात, सुनहरी लाल शर्मा, शिवप्रताप सिंह, विवेक तिवारी, मनोज राठौर, पंकज राठौर, सतेंद्र यादव, सुधीर राघव, शैलेंद्र सोलंकी, नवीन सिंह आदि मौजूद थे।
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