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जिले की जमीन बंजर होने की कगार पर

Sat, 31 Oct 2015 05:53 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
ब्यूरो अमर उजाला, एटा Updated Sat, 31 Oct 2015 05:53 PM IST
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District of barren land on the verge of
गत कई वर्षों से कृषि उत्पादकता में लगातार गिरावट होना चिंता का विषय बन गया है। मिट्टी की ताजा रिपोर्ट ने इस चिंता को और गंभीर बना दिया है। जिले की लगभग सभी विकास खंडों की मिट्टी में नाइट्रोजन व फास्फोरस की मात्रा अति न्यून और जीवांश कार्बन गायब होना खतरे की घंटी है।
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मृदा की उर्वरा शक्ति इतनी तेजी से घटती रही तो आने वाले दशक में जमीन बंजर हो जाएगी। रासायनिक उर्वरक के अधाधुंध प्रयोग व फसल चक्र बदलने से यह समस्या दिनोंदिन भयावह होती जा रही है।
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मृदा परीक्षण की ताजा रिपोर्ट में आवश्यक तत्वों की लगातार कमी चौंकाने वाली है। मिट्टी में सार्वधिक जरूरी जीवांश की मात्रा 0.80 प्रतिशत से घटकर 0.25 प्रतिशत ही रह गई है।
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कृषि विशेषज्ञों की मानें तो फास्फोरस और नाइट्रोजन की आत्यधिक कमी फसल में बढ़वार नहीं होने देती है। इनकी कमी का कारण बताते हुए कृषि विशेषज्ञ सुधीर तौमर ने बताया कि किसानों ने अपने खेतों में गोबर की खाद लगाना बंद कर दी है, वहीं हरी खाद का प्रयोग उनके द्वारा नहीं किया जा रहा है।

जानकारों की मानें तो डीएपी व फास्फेट की कीमतें अधिक व यूरिया के दाम कम होने के कारण भी रासायनिक उर्वरक का प्रयोग भी असुंतलित हुआ है और मिट्टी खराब हुई है।
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