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बर्खास्तगी प्रकरण : शिकायतें आते ही गायब कर दिया था फर्जी आदेश

Fri, 29 Nov 2024 09:22 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Fri, 29 Nov 2024 09:22 PM IST
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Dismissal case: Fake order was made disappear as soon as complaints came
एटा। कलेक्ट्रेट में फर्जी आदेश से नौकरी करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई लंबे समय बाद हो सकी। शिकायत आते ही उप्र राजस्व परिषद के इस आदेश को गायब कर दिया गया था। जबकि परिषद ने भी साफ कह दिया था कि ऐसी कोई फाइल वहां है ही नहीं।
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कलेक्ट्रेट में 1993 और 1995 में 30 सीजनल सहायक वासिक बाकी नवीसों को विनियमित कर लिपिक बनाया गया था। इसका आधार उप्र राजस्व परिषद से जारी आदेश था। जिसमें इनके विनियमितीकरण की बात कही गई थी। नौकरी लगने के बाद कुछ लोगों ने शिकायत की। पहले स्थानीय तो बाद में शासन स्तर से गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) ने पड़ताल शुरू कर दी।
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इसके साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति पत्रावली से बोर्ड के इस आदेश को गायब कर दिया गया। आदेश के बारे में जब स्थानीय स्तर से जानकारी नहीं मिली तो शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने परिषद से आदेश की जानकारी मांगी थी। 2019 में परिषद ने पत्र जारी कर जवाब दिया था कि यह पत्रावली काफी प्रयास के बावजूद उपलब्ध नहीं हुई। इसके साथ ही पुष्ट हो गया था कि स्थानीय स्तर पर दिया गया आदेश फर्जी है।
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2020 में आरटीआई कार्यकर्ता रवीश गोला ने आरटीआई के तहत आवेदन कर जिलाधिकारी से जवाब मांगा। लिपिकों की नियुक्ति के आदेश के सवाल पर जवाब दिया गया कि लिपिकों की व्यक्तिगत पत्रावलियों में परिषद के आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं है। अब इन कर्मचारियों का विनियमितीकरण नियम विरुद्ध मानते हुए बर्खास्तगी, पेंशन वसूली आदि की कार्रवाई तो कर दी गई है, लेकिन अब भी सवाल कायम है कि फर्जी आदेश किसने बनवाया और इस मामले में कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?


यह हुई है कार्रवाई
एसआईटी की रिपोर्ट और शासन के निर्णय के आधार पर 4 कर्मचारियों को सेवा से पदच्युत किया गया है। जबकि 15 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन रोकते हुए सेवाकाल व इसके बाद लिए गए सभी भुगतानों की रिकवरी कराने का आदेश दिया गया है। अभिलेख गायब करने में संदिग्ध 5 कर्मचारियों के विरुद्ध पेंशन रोकने की कार्रवाई की गई है।

वर्जन
एक मामले में एक तरह के दंड का प्रावधान है। एफआईआर को लेकर शासन से भी कोई आदेश नहीं था। -सत्य प्रकाश, एडीएम प्रशासन
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