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लू लगने से मौत पर स्वास्थ्य विभाग होगा जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो एटा
Updated Sat, 14 May 2016 11:27 PM IST
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इस समय गर्मी पूरे शबाब पर है। शनिवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।
- फोटो : अमर उजाला
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इस समय गर्मी पूरे शबाब पर है। शनिवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। इसकी वजह से जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या प्रतिदिन 17 सौ के पार पहुंच रही है। इसमें 400 से 500 सौ मरीज प्रतिदिन डायरिया, उल्टी, दस्त और पेचिश के आ रहे हैं। मौसम विभाग ने भी मई और जून में झुलसने वाली गर्मी पड़ने की भविष्यवाणी की है। इसकी वजह से केंद्र सरकार ने भी हीटवेब (लू) को लेकर हाईअर्लट जारी किया है। डीएम को भेजे पत्र में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधक प्रधिकरण ने कार्य योजना तैयार कर भेजते हुए हीटवेब से अर्लट रहने को कहा है। हीटवेब से मौत होने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य महकमे की तय की गई है।
केंद्र सरकार ने हीटवेब से बचाव के लिए कार्ययोजना तैयार की है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश के सभी डीएम को भेजे पत्र में चिकित्सकीय इकाईयों में हीटवेब को लेकर तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। एडीएम वित्त महेश चंद्र ने बताया कि आपदा प्रबंधन का पत्र मिलने के बाद डीएम अजय यादव ने सीएमओ को निर्देश दिए हैं। एडीएम ने बताया कि डीएम द्वारा जारी निर्देशों में जिले के सभी पीएचसी व सीएचसी प्रभारियों को इसके लिए सीएमओ से पत्र लिख निर्देश जारी करने को कहा गया है। आपदा प्रबंधन ने हर सप्ताह रिपोर्ट भेजने को कहा है। पीएचसी और सीएचसी में गर्मी से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए दवाईयों की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश के साथ अस्पतालों में क्लोरीन की गोलियां, ब्लीचिंग, जिंक टैबलेट और ओआरएस के पैकेट होना अनिवार्य कर दिया गया है। सीएमओ आरसी पांडेय ने बताया कि तत्काल प्रभाव से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आशाओं को भी ओरएस घोल विभाग की ओर से वितरित कर दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन ने कार्य योजना में हीटवेब को तीन श्रेणियों हीट क्रैंप, हीट स्ट्रोक और हीट एक्जॉशन मे बांटा है।
हीटवेब के लक्षण
शरीर में सूजन, बेहोशी एवं बुखार। थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, मितली, मांस पेशियों में अकड़न, अधिक पसीना आना। लू लगने पर शरीर का तापमान 40 डिग्री या इससे अधिक होना, व्यवहार में परिवर्तन या भ्रम की स्थित, कोमा में जाना। इससे भी मौत हो सकती है।
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ऐसे में क्या करें
पानी अधिक से अधिक पिये, हल्के रंगों के सूती कपड़े पहनें, धूप में छाता, टोपी या फिर चश्मा लगाकर निकलें, शीतल जल से स्नान करें, एसी या कूलर में बैठने के बाद तुरंत धूप में न निकलें, घरों के आसपास सफाई रखें, ताजा खाना खाएं, उल्टी दस्त होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सीय परामर्श लें।
क्या न करें
दोपहर 12 से तीन के बीच धूप में सड़क पर न निकलें, चाय, कॉफी, एल्कोहल एवं कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन न करें। तापमान अधिक होने पर अत्यधिक परिश्रम वाले कार्य कम करें।
कई स्कूलों में हुई छुट्टियां
बढ़ते तापमान को देखते हुए शहर के कई पब्लिक स्कूलों में एक से पांच तक के बच्चों की छुट्टियां कर दी गई हैं। स्कूल संचालकों की मानें तो कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि दोपहर के समय बच्चे गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। इसकी वजह से एक सप्ताह पूर्व छुट्टियां की गई है। वैसे विद्यालय 20 मई के बाद ही बंद होते।
मृत्यु प्रोफार्मा पर देनी होगी जानकारी
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हीटवेब से होने वाली मौतों के लिए एक प्रोफार्मा तय करते हुए स्वास्थ्य महकमे की जिम्मेदारी तय की है। विभाग को लू लगने से किसी व्यक्ति की मौत होने पर निर्धारित प्रोफार्मा में उसका ब्योरा भेजना होगा। प्रोफार्मा में मौत के कारण और बीमारी के लक्षण भी लिख कर प्राधिकरण को भजा जाएगा।
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केंद्र सरकार ने हीटवेब से बचाव के लिए कार्ययोजना तैयार की है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश के सभी डीएम को भेजे पत्र में चिकित्सकीय इकाईयों में हीटवेब को लेकर तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। एडीएम वित्त महेश चंद्र ने बताया कि आपदा प्रबंधन का पत्र मिलने के बाद डीएम अजय यादव ने सीएमओ को निर्देश दिए हैं। एडीएम ने बताया कि डीएम द्वारा जारी निर्देशों में जिले के सभी पीएचसी व सीएचसी प्रभारियों को इसके लिए सीएमओ से पत्र लिख निर्देश जारी करने को कहा गया है। आपदा प्रबंधन ने हर सप्ताह रिपोर्ट भेजने को कहा है। पीएचसी और सीएचसी में गर्मी से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए दवाईयों की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश के साथ अस्पतालों में क्लोरीन की गोलियां, ब्लीचिंग, जिंक टैबलेट और ओआरएस के पैकेट होना अनिवार्य कर दिया गया है। सीएमओ आरसी पांडेय ने बताया कि तत्काल प्रभाव से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आशाओं को भी ओरएस घोल विभाग की ओर से वितरित कर दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन ने कार्य योजना में हीटवेब को तीन श्रेणियों हीट क्रैंप, हीट स्ट्रोक और हीट एक्जॉशन मे बांटा है।
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हीटवेब के लक्षण
शरीर में सूजन, बेहोशी एवं बुखार। थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, मितली, मांस पेशियों में अकड़न, अधिक पसीना आना। लू लगने पर शरीर का तापमान 40 डिग्री या इससे अधिक होना, व्यवहार में परिवर्तन या भ्रम की स्थित, कोमा में जाना। इससे भी मौत हो सकती है।
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ऐसे में क्या करें
पानी अधिक से अधिक पिये, हल्के रंगों के सूती कपड़े पहनें, धूप में छाता, टोपी या फिर चश्मा लगाकर निकलें, शीतल जल से स्नान करें, एसी या कूलर में बैठने के बाद तुरंत धूप में न निकलें, घरों के आसपास सफाई रखें, ताजा खाना खाएं, उल्टी दस्त होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सीय परामर्श लें।
क्या न करें
दोपहर 12 से तीन के बीच धूप में सड़क पर न निकलें, चाय, कॉफी, एल्कोहल एवं कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन न करें। तापमान अधिक होने पर अत्यधिक परिश्रम वाले कार्य कम करें।
कई स्कूलों में हुई छुट्टियां
बढ़ते तापमान को देखते हुए शहर के कई पब्लिक स्कूलों में एक से पांच तक के बच्चों की छुट्टियां कर दी गई हैं। स्कूल संचालकों की मानें तो कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि दोपहर के समय बच्चे गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। इसकी वजह से एक सप्ताह पूर्व छुट्टियां की गई है। वैसे विद्यालय 20 मई के बाद ही बंद होते।
मृत्यु प्रोफार्मा पर देनी होगी जानकारी
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हीटवेब से होने वाली मौतों के लिए एक प्रोफार्मा तय करते हुए स्वास्थ्य महकमे की जिम्मेदारी तय की है। विभाग को लू लगने से किसी व्यक्ति की मौत होने पर निर्धारित प्रोफार्मा में उसका ब्योरा भेजना होगा। प्रोफार्मा में मौत के कारण और बीमारी के लक्षण भी लिख कर प्राधिकरण को भजा जाएगा।