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बेटियों की उड़ान, परिवार को दिलाई पहचान
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पुत्री आराधना के साथ माता-पिता। संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। ये आधुनिक युग की वो बेटियां हैं जो किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। ऐसी ही शहर की दो बेटियों ने न सिर्फ अपने पैरों पर खड़े होकर अपनी पहचान स्थापित की, बल्कि परिवार को भी पहचान दिलाई। इनमें से एक बेटी सेना में मेजर और एक एम्स आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) में वैज्ञानिक के तौर पर देश की सेवा कर रही हैं। परिवारों को अपनी बेटियों पर नाज है।
शहर के मोहल्ला शृंगार नगर निवासी सत्येंद्रपाल सिंह चौहान पेशे से अधिवक्ता हैं। चार बच्चों में सबसे छोटी अनुराधा चौहान ने सेना में जाने का जज्बा दिखाया तो पिता ने भी उत्साह के साथ इसका सम्मान किया। 2015 में सीडीएस (कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज) का कांप्टीशन क्वालिफाई किया। लेफ्टिनेंट के रूप में पहली पोस्टिंग कुपवाड़ा आयुुध डिपो में मिली। सितंबर 2017 में प्रोन्नति के बाद कैप्टन बन गईं। सत्येंद्र सिंह एड. ने बताया कि एक और प्रोन्नति पाकर अनुराधा चौहान मेजर बन चुकी हैं। फिलहाल उसकी तैनाती भटिंडा (पंजाब) आयुध डिपो में है। वह कहते हैं कि बेटी के हौसले और मेहनत से समाज में पूरे परिवार का सम्मान बढ़ा है।
उधर, पुलिस लाइंस कॉलोनी निवासी ध्यानपाल यादव को अपनी बेटी अपेक्षा यादव पर फक्र है। मेडिकल में पढ़ाई के बाद 2014 में उन्हें ईरान में हुई एक सेमिनार में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। यह बहुत बड़ा अवसर था। साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हुई इस सेमिनार में दुनियाभर के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि आए थे। अपेक्षा के प्रतिनिधित्व ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद एम्स दिल्ली में सेवाएं देने लगीं। ध्यानपाल यादव ने बताया कि बेटी अब एम्स आईसीएमआर में स्थायी वैज्ञानिक है। अभी डायबिटीज पर होने वाले शोधों में जुटी हुई है।
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जिले में 886 का है लिंगानुपात
जिले में लिंगानुपात बहुत अच्छा नहीं है। जनगणना 2011 के अनुसार यहां 1000 पुरुषों पर 886 महिलाएं हैं। जबकि बाल लिंगानुपात की स्थिति और खराब है। यहां 1000 बालकों पर 879 बालिकाएं हैं। सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि लिंगानुपात में सुधार के लिए कई विभागों के समन्वय से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच और गर्भपात करने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
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शहर के मोहल्ला शृंगार नगर निवासी सत्येंद्रपाल सिंह चौहान पेशे से अधिवक्ता हैं। चार बच्चों में सबसे छोटी अनुराधा चौहान ने सेना में जाने का जज्बा दिखाया तो पिता ने भी उत्साह के साथ इसका सम्मान किया। 2015 में सीडीएस (कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज) का कांप्टीशन क्वालिफाई किया। लेफ्टिनेंट के रूप में पहली पोस्टिंग कुपवाड़ा आयुुध डिपो में मिली। सितंबर 2017 में प्रोन्नति के बाद कैप्टन बन गईं। सत्येंद्र सिंह एड. ने बताया कि एक और प्रोन्नति पाकर अनुराधा चौहान मेजर बन चुकी हैं। फिलहाल उसकी तैनाती भटिंडा (पंजाब) आयुध डिपो में है। वह कहते हैं कि बेटी के हौसले और मेहनत से समाज में पूरे परिवार का सम्मान बढ़ा है।
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उधर, पुलिस लाइंस कॉलोनी निवासी ध्यानपाल यादव को अपनी बेटी अपेक्षा यादव पर फक्र है। मेडिकल में पढ़ाई के बाद 2014 में उन्हें ईरान में हुई एक सेमिनार में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। यह बहुत बड़ा अवसर था। साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हुई इस सेमिनार में दुनियाभर के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि आए थे। अपेक्षा के प्रतिनिधित्व ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद एम्स दिल्ली में सेवाएं देने लगीं। ध्यानपाल यादव ने बताया कि बेटी अब एम्स आईसीएमआर में स्थायी वैज्ञानिक है। अभी डायबिटीज पर होने वाले शोधों में जुटी हुई है।
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जिले में 886 का है लिंगानुपात
जिले में लिंगानुपात बहुत अच्छा नहीं है। जनगणना 2011 के अनुसार यहां 1000 पुरुषों पर 886 महिलाएं हैं। जबकि बाल लिंगानुपात की स्थिति और खराब है। यहां 1000 बालकों पर 879 बालिकाएं हैं। सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि लिंगानुपात में सुधार के लिए कई विभागों के समन्वय से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच और गर्भपात करने वालों पर कार्रवाई की जाती है।

पुत्री अपेक्षा के साथ ध्यानपाल यादव। संवाद- फोटो : ETAH