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लिपटकर पांव से बजती, ये पायल का मुकद्दर है
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कुतुबपुर स्थित महाविद्यालय में आयोजित कवि सम्मेलन पुस्तक विमोचन करते अतिथि और कविगण
- फोटो : ETAH
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एटा। पूरनमल शिक्षण संस्थान कुतुबपुर में गीत-गजल और लोकगीतों की बौछार कर कवियों ने देश-परिवेश, होली और राष्ट्रीय एकता-अखंडता सहित मौजूदा दौर को जीवंत कर दिया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन से पहले कवि पूरनमल की दो पुस्तकों ‘लहरों पर तैरते मोती’ और ‘दास कवि का काव्य कलश’ का विमोचन किया गया। इस दौरान श्याम सुंदर अंकिचन की ‘रचना लिपटकर पांव से बजती ये पायल का मुकद्दर है...’ ने खूब वाहवाही लूटी।
इस दौरान कवयित्री योगिता चौहान ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। ओज के कवि उमेश उत्साही ने रचना पढ़ी ‘विश्व गुरु हम तभी बनेंगे, विद्वानों को जब मान मिले...’, अजय अंजान ने वीर रस की कविता का पाठ किया ‘खिलाफत यदि करोगे देश की, मुहंतोड़ जवाब देंगे...’। डॉ. राकेश सक्सेना ने होली के गीत गाकर लोगों को गुदगुदाया ‘फागुनी पर्व ये निराला है, इसकी मस्ती ने दिल उछाला है...।’ वहीं, दिल्ली से पधारे सुनहरी लाल, डॉ. जितेंद्र सिंह महेंद्र मिहोनवी, निर्मल सक्सेना, डॉ. ज्योत्सना शर्मा आदि ने अपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी।
अध्यक्षता पूर्व विधायक प्रजापालन वर्मा ने और संचालन डॉ. राकेश सक्सेना ने किया। संयोजक हरिसेवक दास और हरिहर वर्मा ने अतिथियों और कवियों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। इस मौके पर अमर पाल सिंह लोधी, डॉ. जितेंद्र पाल सिंह, दुष्यंत वशिष्ठ, अशोक, रामप्रकाश, चंद्रशेखर, रामवीर सिंह, राजहादुर सिंह, ब्रजनंदन, पवन कुमार, नन्नू सिंह वर्मा, नेम सिंह, हरेंद्र राजपूत आदि मौजूद रहे।
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इस दौरान कवयित्री योगिता चौहान ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। ओज के कवि उमेश उत्साही ने रचना पढ़ी ‘विश्व गुरु हम तभी बनेंगे, विद्वानों को जब मान मिले...’, अजय अंजान ने वीर रस की कविता का पाठ किया ‘खिलाफत यदि करोगे देश की, मुहंतोड़ जवाब देंगे...’। डॉ. राकेश सक्सेना ने होली के गीत गाकर लोगों को गुदगुदाया ‘फागुनी पर्व ये निराला है, इसकी मस्ती ने दिल उछाला है...।’ वहीं, दिल्ली से पधारे सुनहरी लाल, डॉ. जितेंद्र सिंह महेंद्र मिहोनवी, निर्मल सक्सेना, डॉ. ज्योत्सना शर्मा आदि ने अपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी।
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अध्यक्षता पूर्व विधायक प्रजापालन वर्मा ने और संचालन डॉ. राकेश सक्सेना ने किया। संयोजक हरिसेवक दास और हरिहर वर्मा ने अतिथियों और कवियों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। इस मौके पर अमर पाल सिंह लोधी, डॉ. जितेंद्र पाल सिंह, दुष्यंत वशिष्ठ, अशोक, रामप्रकाश, चंद्रशेखर, रामवीर सिंह, राजहादुर सिंह, ब्रजनंदन, पवन कुमार, नन्नू सिंह वर्मा, नेम सिंह, हरेंद्र राजपूत आदि मौजूद रहे।
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