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खेतों में दफन हो गई फसलें, फीका पड़ा किसानों का वैशाख
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
Updated Wed, 29 Apr 2015 11:26 PM IST
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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसान को बर्बाद कर दिया है
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तो वहीं इसकी मार व्यापारी वर्ग पर भी है। खेतों में गेहूं की फसल चौपट
हुई तो बाजारों की रौनक ही चली गई। कम पैदावार होने से किसान बाजारों की ओर
रुख नहीं कर रहे हैं। सहालग शुरू होने के बावजूद बाजारों में रौनक नहीं
है। वैशाख से तमाम उम्मीदें लगाए किसान इस वैशाख खाली हाथ है।
वैशाख का महीना किसानों के लिए सपनों की सौगातें लेकर आता था। फसल कटती थी तो लोग उसे बाजारों में बेचकर वर्ष भर के अधूरे कार्य पूरे करते थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। बारिश की चोट से आहत किसान अपने दर्द से नहीं उबर पा रहा है। बाजारों में पसरा सन्नाटा व्यापारियों को खटक रहा है तो वहीं धनाभाव के चलते किसान भी बाजार से दूरी बनाए हैं।
गौरतलब है कि कुदरत की मार ने किसानों समेत हर वर्ग को प्रभावित किया है। बारिश की तबाही ने गेहूं, जौ आदि का उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम है। रवी की फसल में नुकसान के कारण किसान अपने खर्चों की पूर्ति नहीं कर पा रहा है। वैैशाख में दुकानदारों को किसानों से पूरी साल का मुनाफ ा मिल जाता था। गेहूं कम होने के कारण किसान पहले अपने लिए साल भर के अनाज को सहज रहा हैं। इसके बाद बचे अनाज को ही बाजार में ला रहा हैं। गल्ला व्यापारी चुन्नीलाल का कहना है कि इस वर्ष किसानों की फसल चौपट हो जाने से गेहूं, जौ, चना, सरसों दुकान पर बहुत कम आ रहा है।
कपड़ा व्यवसायी माधव अग्रवाल कहते है कि इन दिनों दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी, लेकिन इस वर्ष बाजारों में भीड़ नदारद है। परचून व्यवसायी विक्की एवं प्रमोद कहते हैं कि किसानों पर आर्थिक संकट से दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। सबसे अधिक दुकानदारी किसानों से ही हुआ करती थी। फसल की बर्बादी के चलते किसान स्वयं परेशान हैं।
704 करोड़ के कर्ज में डूबा जिले का किसान
जिले का किसान कर्ज में डूबा हुआ है। उस पर 704 करोड़ का कर्ज है। उसकी फसल बर्बाद हो चुकी है। किसान को चिंता सता रही है कि वह अपना कर्ज किस तरह चुकाएगा।
जिले में अधिकांश मझौला किसान हैं। उनके पास इतना धन नही होता कि वह अपने पास से फसल के लिए लागत लगा सके। उसे फसल बोने के लिए कर्ज का सहारा लेना होता है। फसल से जो पैदा होता है उससे वह कर्ज चुकाता है और बचे धन से अपने घर का खर्च का चलाता है। शासन ने किसानों के लिए जो केसीसी योजना संचालित कर रखी है उसके जरिए किसान कर्ज लेकर अपनी फसल उगाते हैं। इसके अलावा किसान सहकारी बैंक से भी कर्ज लेता है। जिले में 1,18,171 किसान बैंकों का कर्ज दाता है। इन किसानों में से 37946 किसानों ने सहकारी बैंकों से कर्ज ले रखा है। इन बैंकों का 100 करोड़ रुपया किसानों को चुकाना है। जबकि 80225 किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 604.12 करोड़ रुपया कर्ज ले रखा है। इन किसानों पर इतना अधिक कर्ज है कि यह कर्ज चुकाना उनके लिए इस बर्ष काफी मुश्किल हो रहा है।
किसानों के लिए सहकारी बैंक से जो कर्ज दिया जाता है। उनमें कई-कई साल कर्ज जमा नही हो पाता।
- संतोष कुमार प्रबंधक सहकारी बैंक
जरूरतमंद किसानों के लिए बैंके किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज देती हैं। यह कर्ज एक वर्ष के लिए दिया जाता है। कर्ज अदा हो जाने के बाद ही अगले वर्ष ऋण दिया जाता है।
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- बीके गुप्ता प्रबंधक लीड बैंक
वैशाख का महीना किसानों के लिए सपनों की सौगातें लेकर आता था। फसल कटती थी तो लोग उसे बाजारों में बेचकर वर्ष भर के अधूरे कार्य पूरे करते थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। बारिश की चोट से आहत किसान अपने दर्द से नहीं उबर पा रहा है। बाजारों में पसरा सन्नाटा व्यापारियों को खटक रहा है तो वहीं धनाभाव के चलते किसान भी बाजार से दूरी बनाए हैं।
गौरतलब है कि कुदरत की मार ने किसानों समेत हर वर्ग को प्रभावित किया है। बारिश की तबाही ने गेहूं, जौ आदि का उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम है। रवी की फसल में नुकसान के कारण किसान अपने खर्चों की पूर्ति नहीं कर पा रहा है। वैैशाख में दुकानदारों को किसानों से पूरी साल का मुनाफ ा मिल जाता था। गेहूं कम होने के कारण किसान पहले अपने लिए साल भर के अनाज को सहज रहा हैं। इसके बाद बचे अनाज को ही बाजार में ला रहा हैं। गल्ला व्यापारी चुन्नीलाल का कहना है कि इस वर्ष किसानों की फसल चौपट हो जाने से गेहूं, जौ, चना, सरसों दुकान पर बहुत कम आ रहा है।
कपड़ा व्यवसायी माधव अग्रवाल कहते है कि इन दिनों दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी, लेकिन इस वर्ष बाजारों में भीड़ नदारद है। परचून व्यवसायी विक्की एवं प्रमोद कहते हैं कि किसानों पर आर्थिक संकट से दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। सबसे अधिक दुकानदारी किसानों से ही हुआ करती थी। फसल की बर्बादी के चलते किसान स्वयं परेशान हैं।
704 करोड़ के कर्ज में डूबा जिले का किसान
जिले का किसान कर्ज में डूबा हुआ है। उस पर 704 करोड़ का कर्ज है। उसकी फसल बर्बाद हो चुकी है। किसान को चिंता सता रही है कि वह अपना कर्ज किस तरह चुकाएगा।
जिले में अधिकांश मझौला किसान हैं। उनके पास इतना धन नही होता कि वह अपने पास से फसल के लिए लागत लगा सके। उसे फसल बोने के लिए कर्ज का सहारा लेना होता है। फसल से जो पैदा होता है उससे वह कर्ज चुकाता है और बचे धन से अपने घर का खर्च का चलाता है। शासन ने किसानों के लिए जो केसीसी योजना संचालित कर रखी है उसके जरिए किसान कर्ज लेकर अपनी फसल उगाते हैं। इसके अलावा किसान सहकारी बैंक से भी कर्ज लेता है। जिले में 1,18,171 किसान बैंकों का कर्ज दाता है। इन किसानों में से 37946 किसानों ने सहकारी बैंकों से कर्ज ले रखा है। इन बैंकों का 100 करोड़ रुपया किसानों को चुकाना है। जबकि 80225 किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 604.12 करोड़ रुपया कर्ज ले रखा है। इन किसानों पर इतना अधिक कर्ज है कि यह कर्ज चुकाना उनके लिए इस बर्ष काफी मुश्किल हो रहा है।
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किसानों के लिए सहकारी बैंक से जो कर्ज दिया जाता है। उनमें कई-कई साल कर्ज जमा नही हो पाता।
- संतोष कुमार प्रबंधक सहकारी बैंक
जरूरतमंद किसानों के लिए बैंके किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज देती हैं। यह कर्ज एक वर्ष के लिए दिया जाता है। कर्ज अदा हो जाने के बाद ही अगले वर्ष ऋण दिया जाता है।
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- बीके गुप्ता प्रबंधक लीड बैंक