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घुंघरू-घंटा कारोबार पर संकट, पहली बार रोटेशन व्यवस्था लागू

Fri, 04 Mar 2022 11:14 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 11:14 PM IST
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Crisis on Ghungroo-Ghanta business, rotation system implemented for the first time
जलेसर में बंद पड़ा एक घुंघरू घंटा कारखाना। संवाद - फोटो : ETAH
जलेसर/एटा। घुंघरू, घंटा-घंटी कारोबार पर संकट खड़ा हो गया है। पीतल, तांबा, जिंक आदि का भाव साल भर में दोगुने तक पहुंच गया है। जिसके चलते लागत काफी बढ़ गई है। एक ओर जहां नए महंगे उत्पादों की मांग कम हो गई है। वहीं महंगाई के चलते पुरानी दर के लंबित ऑर्डर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि यहां के कारखानों में पहली बार रोटेशन व्यवस्था लागू की गई है।
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कारीगर और श्रमिकों को एक दिन छोड़कर बुलाया जा रहा है। वहीं, करीब 250 कारखानों में तो फिलहाल अस्थायी रूप से उत्पादन ही बंद कर दिया गया है। जबकि कुल मिलाकर 1000 कारखाने हैं। कोरोना संक्रमण में आए सुधार के बाद पीतल उद्योग को अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी। लेकिन फरवरी से कच्चे माल में आए उछाल के कारण उम्मीदें ढेर हो गई हैं। पीतल, एल्युमिनियम, कॉपर, जिंक की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।
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महीने भर में ही हो गई वृद्धि
महीने भर में भी कच्चे माल के दामों में वृद्धि हुई है। फरवरी में पीतल 450 रुपये प्रति किलो थी, जो अब 495 रुपये प्रति किलो मिल रही है।
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