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तहसीलदार को क्लीन चिट, कानूनगो षड्यंत्र के आरोपी

Sun, 21 May 2017 11:33 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
ब्यूरो, अमर उजाला एटा Updated Sun, 21 May 2017 11:33 PM IST
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clean chit for tahsheeldar, kanoongo charged
जांच - फोटो : demopic

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सालभर पहले वीआईपी खर्च के नाम पर रुपये मांगने का आडियो वायरल होने के मामले की जांच में तहसीलदार सदर को क्लीन चिट मिल गई है। रिर्पोट में कानूनगो को षड्यंत्र का आरोपी बनाया गया है। डीएम ने जांच रिर्पोट राजस्व आयुक्त को भेज दी है।

बीते साल मार्च महीने में तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर प्रसाद और पिलुआ सर्किल के कानूनगो सत्यवीर के बीच बातचीत का एक आडियो वायरल हुआ था जिसमें कानूनगो ने तहसीलदार पर हर महीने वीआईपी खर्च के नाम पर दस हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था।
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ऑडियो में तहसीलदार द्वारा डीएम कार्यालय के एक कर्मचारी से मिलकर वीआईपी व्यवस्था करने को कहते हुए पैसा नहीं देने पर भू माफिया से संबंध होने और राजस्व बोर्ड में शिकायत की धमकी दी गई थी। तत्कालीन डीएम अजय यादव ने जांच बैठाई। इस मामले में प्रभावी  कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई एक्टविस्ट जैथरा के सुनील कुमार ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी।
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सीएम के विशेष सचिव रिगिजयान सैंफिल ने मामले की जांच आयुक्त राजस्व परिषद लखनऊ को सौंपते हुए आख्या तलब की थी। आयुक्त के आदेश पर डीएम ने एडीएम से जांच कराई तो सामने आया कि तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर प्रसाद ने कानूनगो से सरकारी काम के लिए कहा था, लेकिन कानूनगो सत्यवीर सिंह ने काम से बचने के लिए आरोप लगा दिए। डीएम ने जांच रिपोर्ट आयुक्त को भेज दी है। राजस्व परिषद के प्रभारी अधिकारी महेंद्र सिंह ने डीएम की आख्या स्वीकार कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है।


पहली जांच में निराधार बताई गई थी शिकायत
आरटीआई एक्टविस्ट की पहली शिकायत पर जांच तत्कालीन एसडीएम सदर सुनील कुमार वर्मा ने की तो रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार और कानूनगो के बीच वार्ता को नकारते हुए शिकायत निराधार बताई। आपत्ति पर मामले की जांच एसडीएम सदर रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने की उन्होंने रिपोर्ट में लिखा कि दोनों के बीच वार्ता विभागीय कार्यों को लेकर हुई थी। शासन ने जांच रिपोर्ट खारिज कर डीएम और एसएसपी से आख्या मांगने के बाद जांच राजस्व परिषद को सौंप दी गई।
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