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Etah News: विवादित संपत्ति पर बिना नक्शा स्वीकृति करा लिए निर्माण
Thu, 26 Oct 2023 11:06 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 26 Oct 2023 11:06 PM IST
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एटा। शहर के घंटाघर पर बेशकीमती विवादित संपत्ति सवालों के घेरे में है। पूर्व में मंदिर की इस संपत्ति पर व्यावसायिक प्लाॅटिंग करके निर्माण भी करा लिए, लेकिन इसके लिए नक्शे तक पास नहीं कराए गए। प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है। जानकारी होने पर अब कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।
घंटाघर मार्ग पर प्राचीन समय में राधा-कृष्ण मंदिर स्थित था। जिसमें कुछ आवासीय निर्माण भी था। कुछ महीने पहले इस पूरे पुराने निर्माण को ध्वस्त करा दिया गया। हालांकि तबसे ही इस संपत्ति को लेकर उंगलियां उठने लगी थीं। शिकायतें भी की गईं। इसमें बताया गया कि यह मंदिर दान की जमीन पर बना था। इसमें कुछ पक्षकारों के बीच मुकदमे भी चले और बाद में इनमें समझौता कर लिया गया। इसकी शिकायतें स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन तक भेजी गईं। जिस पर केवल ध्वस्तीकरण कराकर काम रोक दिया गया था, लेकिन जैसे ही समय बीतने के साथ मामला कुछ ठंडा हुआ, यहां निर्माण करा दिए गए। दुकानें, गोदाम बना लिए गए हैं।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि छोटे से छोटे मकान निर्माण के लिए नक्शे की अनिवार्यता की जाती है। जबकि इतने बड़े बाजार में करोड़ों की इस जमीन पर निर्माण के लिए नियम-कानून दरकिनार हो गए। विनियमित क्षेत्र के मुताबिक नक्शे के लिए आवेदन जरूर किया गया, लेकिन नियमों का पालन न होने की वजह से इजाजत नहीं दी गई। इसके बावजद निर्माण करा लिया गया है।
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अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आयुष चौधरी ने बताया कि पूर्व में विवादित संपत्ति का मामला संज्ञान में आया था, लेकिन निर्माण किए जाने की बात जानकारी में नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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घंटाघर मार्ग पर प्राचीन समय में राधा-कृष्ण मंदिर स्थित था। जिसमें कुछ आवासीय निर्माण भी था। कुछ महीने पहले इस पूरे पुराने निर्माण को ध्वस्त करा दिया गया। हालांकि तबसे ही इस संपत्ति को लेकर उंगलियां उठने लगी थीं। शिकायतें भी की गईं। इसमें बताया गया कि यह मंदिर दान की जमीन पर बना था। इसमें कुछ पक्षकारों के बीच मुकदमे भी चले और बाद में इनमें समझौता कर लिया गया। इसकी शिकायतें स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन तक भेजी गईं। जिस पर केवल ध्वस्तीकरण कराकर काम रोक दिया गया था, लेकिन जैसे ही समय बीतने के साथ मामला कुछ ठंडा हुआ, यहां निर्माण करा दिए गए। दुकानें, गोदाम बना लिए गए हैं।
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चौंकाने वाली बात तो यह है कि छोटे से छोटे मकान निर्माण के लिए नक्शे की अनिवार्यता की जाती है। जबकि इतने बड़े बाजार में करोड़ों की इस जमीन पर निर्माण के लिए नियम-कानून दरकिनार हो गए। विनियमित क्षेत्र के मुताबिक नक्शे के लिए आवेदन जरूर किया गया, लेकिन नियमों का पालन न होने की वजह से इजाजत नहीं दी गई। इसके बावजद निर्माण करा लिया गया है।
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अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आयुष चौधरी ने बताया कि पूर्व में विवादित संपत्ति का मामला संज्ञान में आया था, लेकिन निर्माण किए जाने की बात जानकारी में नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।