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पटाखों के बाजार पर चाइनीज पटाखों का कब्जा
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Wed, 04 Nov 2015 07:14 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया पर जोर है। लेकिन दीपोत्सव पर जमीन से आसमान तक चाइनीज पटाखों का धमाका और आतिशबाजी दिखाई देगी। देशी पटाखों के बाजार पर चाइनीज पटाखों का कब्जा है।
इसके चलते देशी पटाखे कारोबार भी दम तोड़ रहा है। जो इस पुश्तैनी परिवार इस कारोबार से जुड़े हैं उन्हीं तक यह सिमट कर रह गया है। इसका एक कारण आतिशबाजी के लाइसेंस जारी करने की जटिल शर्तें और नियम है।
इस बार अग्निशमन विभाग द्वारा जिले में 26 कारीगरों को लाइसेंस जारी किए गए हैं।
पटाखा कारीगर गांव शीतलपुर निवासी अजीमुद्दीन ने बताया कि विगत वर्षों से देशी पटाखे बनाने का कारोबार सिमटता जा रहा है। उन्होंने बताया कि लोगों का चाइनीज पटाखों के प्रति आकर्षण है।
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देशी पटाखे लोग कम ही खरीदते हैं। दिवाली पर्व पर कारीगरों को लागत निकाल कर बस दो चार हजार रुपये की बचत हो पाती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में चार पांच साल पहले पटाखा बनाने वालों की संख्या दर्जनों में थीं, जो आज दो ही कारीगरों में सिमट गई है।
अन्य कारीगरों ने बताया कि जिले में अनार सहित तीन तरह के देशी पटाखे बनाए जा रहे हैं। अब लोगों का चाइनीज पटाखों के प्रति आकर्षण अधिक है।
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इसके चलते देशी पटाखे कारोबार भी दम तोड़ रहा है। जो इस पुश्तैनी परिवार इस कारोबार से जुड़े हैं उन्हीं तक यह सिमट कर रह गया है। इसका एक कारण आतिशबाजी के लाइसेंस जारी करने की जटिल शर्तें और नियम है।
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इस बार अग्निशमन विभाग द्वारा जिले में 26 कारीगरों को लाइसेंस जारी किए गए हैं।
पटाखा कारीगर गांव शीतलपुर निवासी अजीमुद्दीन ने बताया कि विगत वर्षों से देशी पटाखे बनाने का कारोबार सिमटता जा रहा है। उन्होंने बताया कि लोगों का चाइनीज पटाखों के प्रति आकर्षण है।
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देशी पटाखे लोग कम ही खरीदते हैं। दिवाली पर्व पर कारीगरों को लागत निकाल कर बस दो चार हजार रुपये की बचत हो पाती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में चार पांच साल पहले पटाखा बनाने वालों की संख्या दर्जनों में थीं, जो आज दो ही कारीगरों में सिमट गई है।
अन्य कारीगरों ने बताया कि जिले में अनार सहित तीन तरह के देशी पटाखे बनाए जा रहे हैं। अब लोगों का चाइनीज पटाखों के प्रति आकर्षण अधिक है।