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Etah News: बौद्धों की धर्म स्थली अतरंजीखेड़ा विकास को तरसी

Sat, 11 Mar 2023 11:21 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Sat, 11 Mar 2023 11:21 PM IST
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Buddhist religious place Atranjikheda yearns for development
एटा। बौद्धों की धर्म स्थली के रूप में एटा की पहचान कराने वाला अतरंजीखेड़ा विकास के लिए तरस रहा है। सरकार ने एक जिला एक उत्पादन की तर्ज पर एक जिला एक पर्यटन स्थल में शामिल कर दिया है। इसके बाद भी ब्लॉक मारहरा क्षेत्र स्थित अतरंजीखेड़ा विकास की बाट जोह रहा है।
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बताया जाता है कि यहां पर भगवान बुद्ध ने तीन माह वर्षावास (बरसात के तीन माह का वास) किया था। इसकी वजह से बौद्ध धर्म प्रेमी और अनुयायी इसे धर्म स्थल के रूप में मानते हैं। यहां अक्तूबर से मार्च तक बौद्ध भिक्षु व धर्म प्रेमी म्यांमर, तिब्बत, थाईलैंड, चीन, कंबोडिया और नेपाल से आते हैं। इसके बाद भी क्षेत्र के विकास के लिए विशेष कदम नहीं उठाए गए। विदेशी पर्यटकों को आज तक कुछ भी नया नहीं दिखाई देता है।
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यहां के टीले पर एक स्तूप बना हुआ है, वहां पर बौद्ध प्रतिमा को लगाया गया है। यहां पर आने वाले पर्यटकों को जर्जर सड़कों और पथरीले रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। विदेशों से आने वाले बौद्ध अनुयायी विकास से दूर धर्म स्थल को देखकर आत्म संतुष्ट नहीं हो पाते हैं। संवाद
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चार किमी क्षेत्रफल में फैला है धर्म स्थल
बौद्ध धर्म स्थल के नाम से ख्याति प्राप्त अतरंजीखेड़ा 4.4022 वर्ग किलो मीटर क्षेत्रफल में फैला है। ऊंचाई करीब 20 मीटर तक है। यहां वर्तमान में भी चरवाहे जानवरों को चराते हैं। पर्यटक स्थल की चहारदीवारी के अलावा अन्य कोई विकास कार्य नहीं हो सका है।


उत्खनन में निकले थे बौद्ध कालीन अवशेेष
ग्राम पंचायत अचलपुर में आने वाले (अतरंजीखेड़ा) राजा बेनचक्र की बेरंजा नाम से राजधानी थी, यहां पर 517 ईसा पूर्व में वर्षा के तीन महीने भगवान बुद्ध ने प्रवास किया था। राजा बेन बौद्ध धर्म को मानने वाले थे। यहां पर अंग्रेज सरकार ने भी ठिकाना बनाया था और 1890 के करीब उत्खनन कराया तो बौद्ध कालीन मूर्तियां, बर्तन और प्राचीन सभ्यता से जुड़ी तमाम चीजें मिलीं थीं।



अप्रैल में होगी कई देशों के अनुुयायियों की धम्म यात्रा
पूर्व प्रधान निरोत्तम सिंह ने बताया कि अप्रैल में संकिसा फर्रुखाबाद से अतरंजीखेड़ा तक कई देेेशों की अनुयायियों की ओर से धम्म यात्रा होने जा रही है। इसके लिए मार्च में ही तिथि का निर्धारण किया जाएगा।


पर्यटन स्थल बनाने के लिए टीले की खुदाई की जानी चाहिए। यहां पर बौद्ध कालीन बहुत सी चीजें निकलने की उम्मीदें है, उनका म्यूजियम बनाया जाए इसके साथ ही विकास किया जाए। - निरोत्तम सिंह, पूर्व प्रधान



बौद्ध अनुयायी हजारों की संख्या में प्रतिवर्ष आते हैं, यहां शौचालय तक की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। पर्यटकों को काफी परेशानी होती है, खुदाई कराकर म्यूजियम व अन्य विकास बहुत जरूरी हैं। - पप्पू सिंह, प्रधान
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