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Etah News: ब्रह्मानंद मौनी स्वामी ने ली समाधि, अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़
Mon, 05 Feb 2024 11:40 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 05 Feb 2024 11:40 PM IST
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अलीगंज। विकासखंड के गांव जाजलपुर निवासी श्री श्री 1008 त्रिदंडीय ब्रह्मानंद मौनी स्वामी महाराज ने सोमवार सुबह प्राण त्याग समाधि ले ली। वह कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे।
स्वामी जी के ब्रह्मलीन होने की खबर जैसे ही आसपास के क्षेत्र में पहुंची तो उनके अंतिम दर्शनों के लिए हुजूम उमड़ पड़ा। दूर-दूर से शिष्य, अनुयायी आदि लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। उनके शिष्यों ने बताया कि स्वामी जी ने बचपन में अपने घर का त्याग कर दिया था। जिसके बाद जाजल ऋषि के आश्रम में ही अपनी कुटिया बनाई। जहां उन्होंने कठोर तप किया और त्रिदंडीय स्वामी बने। वर्षो तक मौन धारण किए रहे। केवल लिखकर ही सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे।
वह हमेशा भौतिकवादी दुनिया से दूर रहते थे। कभी उन्होंने अपना फोटो भी किसी को नहीं लेने दिया। भगवान नरसिंह और हनुमान जी की जयंती पर विशेष हवन पूजा-पाठ कराते थे। कपड़ों के नाम पर केवल एक वस्त्र ही हमेशा धारण किया। ब्रह्मलीन होने पर वैदिक मंत्रोच्चार और कार्यों के साथ उनकी जल समाधि कांपिल के अटैना घाट पर दी गई। भक्तों का हुजूम साथ रहा।
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स्वामी जी के ब्रह्मलीन होने की खबर जैसे ही आसपास के क्षेत्र में पहुंची तो उनके अंतिम दर्शनों के लिए हुजूम उमड़ पड़ा। दूर-दूर से शिष्य, अनुयायी आदि लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। उनके शिष्यों ने बताया कि स्वामी जी ने बचपन में अपने घर का त्याग कर दिया था। जिसके बाद जाजल ऋषि के आश्रम में ही अपनी कुटिया बनाई। जहां उन्होंने कठोर तप किया और त्रिदंडीय स्वामी बने। वर्षो तक मौन धारण किए रहे। केवल लिखकर ही सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे।
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वह हमेशा भौतिकवादी दुनिया से दूर रहते थे। कभी उन्होंने अपना फोटो भी किसी को नहीं लेने दिया। भगवान नरसिंह और हनुमान जी की जयंती पर विशेष हवन पूजा-पाठ कराते थे। कपड़ों के नाम पर केवल एक वस्त्र ही हमेशा धारण किया। ब्रह्मलीन होने पर वैदिक मंत्रोच्चार और कार्यों के साथ उनकी जल समाधि कांपिल के अटैना घाट पर दी गई। भक्तों का हुजूम साथ रहा।
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