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बिना पानी के सिंचाई में हो रही परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Feb 2017 11:36 PM IST
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सिंचाई में हो रही परेशानी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जिले में जल अन्नदाता के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। सिंचाई के प्रमुख साधन टेल, माइनर और रजबहा सूखे पड़े हैं। कई माइनरों में तो खरपतवार उग आई है। सरकारी नलकूप सिंचाई मेें फेल है।
जिले में करीब सवा लाख किसान खेत में सिंचाई के लिए नहरों और रजबहा के पानी पर निर्भर हैं। शेष किसान नलकूप और अन्य साधनों से खेत को सींचते हैं। सिंचाई विभाग का दावा है सर्दियों में हर टेल और माइनर में पानी पहुंचाया गया, लेकिन हकीकत जुदा है। मारहरा के माचुआ रजबहा को पूरी साल पानी का इंतजार रहा। लोकार्पण के बाद भी किसानों को पानी नहीं मिला। रजबहा निर्माण में बरती गई लापरवाही से किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी, लेकिन सिंचाई विभाग ने किसानों को सहूलियत देने को कोई पहल नहीं की। जिले में निचली गंग नहर के जरिये सिंचाई को एक हजार क्यूसेक पानी मिला, लेकिन किसानों की जरूरत पूरी नहीं हुई। इसके बाद किसानों ने नलकूपों का सहारा लिया, लेकिन वहां भी तकनीकी खामियों में किसान उलझ गए। सर्दियों में सिंचाई विभाग हर टेल और माइनर में पानी पहुंचाने में असफल रहा। ऐेसे में गर्मियों में किसानों को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराना कठिन है। अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग रामकिशन कहते हैं कि सिंचाई के लिए किसानों को पर्याप्त पानी मिला है। माचुआ रजबहा का निर्माण हो चुका है। जल्द ही कमियों को दुरुस्त करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिले में नहरों, रजबहों और मनाइनर की लंबाई 650 किमी बताई, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि नहरों, रजबहों और मनाइर में पानी इस बार कितने क्यूसेक आया तो वह बोले डाटा एकत्र कर जानकारी दे पाऊंगा।
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मेहमंता में सफेद हाथी बना नलकूप
जैथरा के गांव मेहमंता में सरकारी नलकूप सफेद हाथी बनकर रह गया है। पिछले 20 दिनों से नलकूप खराब होने से किसान परेशान हैं। नलकूप खंड के प्रभारी अधिकारी मनोज कुमार कहते हैं कि जिले में 359 नलकूप संचलित हैं। उन्होंने कहा कि सभी नलकूप चालू हालत में है।
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कहते हैं किसान
जैथरा निवासी किसान गौरव चौहान का कहना है कि टेल और माइनर तो सूखे पड़े हुए हैं। ऐसे में नलकूप का सहारा था, लेकिन अब वो भी खराब पड़ा है। महमंता के राजू, रामबाबू ने बताया कि बंबे को समय पर पानी नहीं मिला, तो सिंचाई अधूरी रह गई है। पानी की कमी से पैदावार कम होने की चिंता सता रही है। पीने के लिए पानी मयस्सर नहीं है। जैथरा निवासी बडे़ लाला ने बताया कि किसानों के लिए पानी वरदान की तरह से होता है। ऐसे में किसानों को पानी के अलावा कुछ भी सूझता नहीं है।
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जिले में करीब सवा लाख किसान खेत में सिंचाई के लिए नहरों और रजबहा के पानी पर निर्भर हैं। शेष किसान नलकूप और अन्य साधनों से खेत को सींचते हैं। सिंचाई विभाग का दावा है सर्दियों में हर टेल और माइनर में पानी पहुंचाया गया, लेकिन हकीकत जुदा है। मारहरा के माचुआ रजबहा को पूरी साल पानी का इंतजार रहा। लोकार्पण के बाद भी किसानों को पानी नहीं मिला। रजबहा निर्माण में बरती गई लापरवाही से किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी, लेकिन सिंचाई विभाग ने किसानों को सहूलियत देने को कोई पहल नहीं की। जिले में निचली गंग नहर के जरिये सिंचाई को एक हजार क्यूसेक पानी मिला, लेकिन किसानों की जरूरत पूरी नहीं हुई। इसके बाद किसानों ने नलकूपों का सहारा लिया, लेकिन वहां भी तकनीकी खामियों में किसान उलझ गए। सर्दियों में सिंचाई विभाग हर टेल और माइनर में पानी पहुंचाने में असफल रहा। ऐेसे में गर्मियों में किसानों को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराना कठिन है। अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग रामकिशन कहते हैं कि सिंचाई के लिए किसानों को पर्याप्त पानी मिला है। माचुआ रजबहा का निर्माण हो चुका है। जल्द ही कमियों को दुरुस्त करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिले में नहरों, रजबहों और मनाइनर की लंबाई 650 किमी बताई, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि नहरों, रजबहों और मनाइर में पानी इस बार कितने क्यूसेक आया तो वह बोले डाटा एकत्र कर जानकारी दे पाऊंगा।
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मेहमंता में सफेद हाथी बना नलकूप
जैथरा के गांव मेहमंता में सरकारी नलकूप सफेद हाथी बनकर रह गया है। पिछले 20 दिनों से नलकूप खराब होने से किसान परेशान हैं। नलकूप खंड के प्रभारी अधिकारी मनोज कुमार कहते हैं कि जिले में 359 नलकूप संचलित हैं। उन्होंने कहा कि सभी नलकूप चालू हालत में है।
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कहते हैं किसान
जैथरा निवासी किसान गौरव चौहान का कहना है कि टेल और माइनर तो सूखे पड़े हुए हैं। ऐसे में नलकूप का सहारा था, लेकिन अब वो भी खराब पड़ा है। महमंता के राजू, रामबाबू ने बताया कि बंबे को समय पर पानी नहीं मिला, तो सिंचाई अधूरी रह गई है। पानी की कमी से पैदावार कम होने की चिंता सता रही है। पीने के लिए पानी मयस्सर नहीं है। जैथरा निवासी बडे़ लाला ने बताया कि किसानों के लिए पानी वरदान की तरह से होता है। ऐसे में किसानों को पानी के अलावा कुछ भी सूझता नहीं है।