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Etah News: बैंकों का 607 करोड़ रुपये डूबने के कगार पर
Fri, 31 May 2024 11:05 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 31 May 2024 11:05 PM IST
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एटा। बैंकों के कर्जदार ऋण जमा नहीं कर रहे हैं, इसकी वजह से बैंकों का करीब 607 करोड़ रुपये डूबने के कगार पर है। सहयोग न करने की स्थिति में कर्जदारों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। बैंकें डूबती रकम से कैसे उभरा जा सके, इस पर भी बैंक रणनीति बना रहे हैं। जनपद में संचालित बैंकों का करीब 607 करोड़ रुपया नॉन परफॉर्मेंस असैट (एनपीए) में पहुंच गया है। ऐसे खाताधारक जो कर्ज ले चुके हैं, उनकी ओर से मूलधन व ब्याज जमा नहीं किया गया है। इसकी वजह से बैंक अफसरों की चिंता बढ़ी हुई हैं। इस रकम को वापस लाने के लिए बैंकाें की ओर से कई तरह के प्रयास किए गए हैं और वर्तमान में भी किए जा रहे हैं।
हालांकि बैंक अधिकारियों की मेहनत भी रंग लाई है और दिसंबर 2023 की बात करें तो 615 करोड़ से घटाकर 607 करोड़ पर लगाया है। तीन महीनों में 8 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। अगर ऐसी बैंकों की बात की जाए, जिनका एनपीए सबसे अधिक है, उनमें आर्यावर्त 226 करोड़, केनरा बैंक का 140 करोड़, एसबीआई का 79 करोड़, पीएनबी का 42 करोड़ के करीब है। जब कि शेष अन्य बैंकों का है।
एलडीएम पीतम सिंह ने बताया कि एनपीए पिछले वर्ष से कम हुआ है, जो वर्तमान में 12 फीसदी के करीब है, लेकिन यह भी काफी है। तीन महीने में 8 करोड़ रुपये वसूल किए गए हैं, जो बड़ी उपलब्धि है। कर्जदारों को बैंक से लिया गया ऋण हर हालत में चुकाना होता है। मूलधन व ब्याज समय से जमा करने से बैंक और लेनदार दोनों को ही फायदा होता है। जिन लोगों पर बैंकों का ऋण है वह समय से जमा कर खुद को तनाव मुक्त कर सकते हैं ताकि कार्रवाई से बच सकें।
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हालांकि बैंक अधिकारियों की मेहनत भी रंग लाई है और दिसंबर 2023 की बात करें तो 615 करोड़ से घटाकर 607 करोड़ पर लगाया है। तीन महीनों में 8 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। अगर ऐसी बैंकों की बात की जाए, जिनका एनपीए सबसे अधिक है, उनमें आर्यावर्त 226 करोड़, केनरा बैंक का 140 करोड़, एसबीआई का 79 करोड़, पीएनबी का 42 करोड़ के करीब है। जब कि शेष अन्य बैंकों का है।
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एलडीएम पीतम सिंह ने बताया कि एनपीए पिछले वर्ष से कम हुआ है, जो वर्तमान में 12 फीसदी के करीब है, लेकिन यह भी काफी है। तीन महीने में 8 करोड़ रुपये वसूल किए गए हैं, जो बड़ी उपलब्धि है। कर्जदारों को बैंक से लिया गया ऋण हर हालत में चुकाना होता है। मूलधन व ब्याज समय से जमा करने से बैंक और लेनदार दोनों को ही फायदा होता है। जिन लोगों पर बैंकों का ऋण है वह समय से जमा कर खुद को तनाव मुक्त कर सकते हैं ताकि कार्रवाई से बच सकें।
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