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Etah News: आशा कार्यकर्ताओं ने डीएम आवास के सामने एक घंटे तक जाम रखा मार्ग
Tue, 14 Oct 2025 12:36 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 14 Oct 2025 12:36 AM IST
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जिलाधिकारी आवास के बाहर सड़क पर जाम लगाकर नारेबाजी करती हुईं आशा कार्यकर्ता। संवाद
- फोटो : samvad
एटा। स्वास्थ्य विभाग की आशा व आशा संगिनी सोमवार को अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर सड़क पर उतर आईं। जिलाधिकारी आवास के सामने सड़क पर जाम लगाते हुए नारेबाजी करने लगीं। इस दौरान करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा। एसडीएम सदर ने मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुना और समझाकर जाम खुलवाया। हालांकि धरना 15 अक्तूबर तक जारी रहेगा।
आपकी आवाज सामाजिक संगठन के तले जिले की आशा व आशा संगिनी संचारी रोग नियंत्रण अभियान का बहिष्कार कर कलेक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर शनिवार से धरना प्रदर्शन कर रही हैं। समस्या का समाधान तो दूर किसी अधिकारी के पहुंचकर उनकी बात न सुनने पर वह बिफर गईं। सोमवार को उन्होंने जिलाधिकारी आवास के सामने सड़क पर जाम लगा दिया। जाम लगने की वजह से कई वाहन फंसे रहे। यहां से गुजरने वाले किसानों के लोडर वाहन भी फंस गए।
सूचना पर वहां पहुंचे एसीएमओ डॉ. सुधीर मोहन, सतीश कुमार, डीपीएम आरिफ, ताहिरा अल्वी आदि ने आशाओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन आशाओं ने किसी की भी नहीं सुनी। संगठन की मंडल अध्यक्ष सुषमा चतुर्वेदी ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत आशाओं को 8 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलता है। इस महंगाई के दौर में 8 रुपये में कुछ भी नहीं खरीदा जा सकता है।
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स्वास्थ्य अधिकारियों से आशाओं की कहासुनी चलती रही। करीब एक घंटे बाद मौके पर एसडीएम सदर विपिन कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे। उन्होंने आशाओं को समझाकर जाम खुलवाया। साथ ही आश्वासन दिया कि उनकी 11 सूत्री मांगों को शासन तक भेजा जाएगा। वहां से जो भी जवाब मिलेगा उसके बारे में अवगत कराया जाएगा।
ये हैं मांगें..
- आशा कार्यकर्ताओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाए।
- यात्रा भत्ता दिया जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं की आकस्मिक मृत्यु पर एक मुश्त 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
- सभी आशा कार्यकर्ताओं के आयुष्मान कार्ड बनवाए जाएं।
- आशा कार्यकर्ताओं की मृत्यु के उपरांत परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं का ड्यूटी समय निर्धारित किया जाए।
- 24 दिन की बजाय 30 दिन का विजिट किया जाए।
- सेवानिवृत्त समय 60 वर्ष निर्धारित किया जाए।
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आपकी आवाज सामाजिक संगठन के तले जिले की आशा व आशा संगिनी संचारी रोग नियंत्रण अभियान का बहिष्कार कर कलेक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर शनिवार से धरना प्रदर्शन कर रही हैं। समस्या का समाधान तो दूर किसी अधिकारी के पहुंचकर उनकी बात न सुनने पर वह बिफर गईं। सोमवार को उन्होंने जिलाधिकारी आवास के सामने सड़क पर जाम लगा दिया। जाम लगने की वजह से कई वाहन फंसे रहे। यहां से गुजरने वाले किसानों के लोडर वाहन भी फंस गए।
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सूचना पर वहां पहुंचे एसीएमओ डॉ. सुधीर मोहन, सतीश कुमार, डीपीएम आरिफ, ताहिरा अल्वी आदि ने आशाओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन आशाओं ने किसी की भी नहीं सुनी। संगठन की मंडल अध्यक्ष सुषमा चतुर्वेदी ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत आशाओं को 8 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलता है। इस महंगाई के दौर में 8 रुपये में कुछ भी नहीं खरीदा जा सकता है।
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स्वास्थ्य अधिकारियों से आशाओं की कहासुनी चलती रही। करीब एक घंटे बाद मौके पर एसडीएम सदर विपिन कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे। उन्होंने आशाओं को समझाकर जाम खुलवाया। साथ ही आश्वासन दिया कि उनकी 11 सूत्री मांगों को शासन तक भेजा जाएगा। वहां से जो भी जवाब मिलेगा उसके बारे में अवगत कराया जाएगा।
ये हैं मांगें..
- आशा कार्यकर्ताओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाए।
- यात्रा भत्ता दिया जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं की आकस्मिक मृत्यु पर एक मुश्त 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
- सभी आशा कार्यकर्ताओं के आयुष्मान कार्ड बनवाए जाएं।
- आशा कार्यकर्ताओं की मृत्यु के उपरांत परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं का ड्यूटी समय निर्धारित किया जाए।
- 24 दिन की बजाय 30 दिन का विजिट किया जाए।
- सेवानिवृत्त समय 60 वर्ष निर्धारित किया जाए।