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अधिकारों से अनजान हैं ‘बाल मजदूर’
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
Updated Thu, 11 Jun 2015 11:08 PM IST
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6 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों से काम लेने को कानूनन अपराध माना जाता है। कानून के तहत इस उम्र के बच्चों से काम कराने पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया लेकिन कानून कागजों में ही सिमट कर रह गया है। काम लेने वालों को कार्रवाई का कोई डर नहीं हैं। तभी तो इस उम्र के बच्चे होटल, ढाबों, भट्टों, तंबाकू जैसे कामों में लगे नजर आते हैं। श्रमिक परिवार से जुडे़ लोग भी परिवार के भरण पोषण में सहयोग के लिए बच्चों को काम पर भेज देते हैं। पिछले दिनों श्रम विभाग ने 4 बच्चों को खतरनाक व्यवसाय में काम करते हुए पाया था। ऐसे तमाम बच्चे आज भी विभिन्न व्यवसायों से जुड़े देखे जा सकते हैं लेकिन श्रम विभाग इन पर अंकुश लगाने में सफल नहीं हो पा रहा।
राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना ने तोड़ा दम
कासगंज (ब्यूरो)। वर्ष 2006 में राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना शुरू की गई। इसके तहत बाल श्रमिक विद्यालयों में तीन साल का पाठ्यक्रम लागू किया गया। पाठ्यक्रम के तहत 11 से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बाल श्रमिक बच्चों को शिक्षित करना था। विद्यालयों के संचालन की जिम्मेदारी एनजीओ को सौंपी गई। जनपद विभाजन के समय कासगंज जनपद की सीमा में संचालित 40 विद्यालय जनपद के हिस्से में आए। प्रत्येक विद्यालय में 25 बच्चों को पढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। वर्ष 2009 तक के निर्धारित पाठ्यक्रम का एक बैच तो संचालित हो गया, उसके बाद विद्यालय को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शिथिल हो गई।
एक साल से नही मिला सर्वे का बजट
कासगंज (ब्यूरो)। बालश्रम पर रोक के लिए सर्वे कराने को शासन से बजट मिलता है लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष से बजट नहीं आया है। बजट के अभाव में सर्वे का कार्य भी बाधित है। सर्वे न हो पाने से विभाग के पास बाल श्रमिकों के सही आंकड़े भी संग्रहीत नहीं हो पा रहे।
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संचालित हैं मेधावी छात्र योजना
कासगंज (ब्यूरो)। श्रमिक परिवार के मेधावी बच्चों के लिए योजना संचालित है। कक्षा 5 से 7 तक 70 प्रतिशत अंक लाने पर छात्र को 4000 एवं छात्रा को 4500, कक्षा 8 में छात्र को 5000 एवं छात्रा को 5500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है। 60 प्रतिशत अंक पर कक्षा 9 व 10 में छात्र को 5000 एवं छात्रा को 5500 रुपये, इंटरमीडिएट में छात्र को 8000 रुपये एवं छात्रा को 10000 रुपये तथा स्नातक कक्षा से डिप्लोमा में 10000 से 22000 रुपये तक छात्रवृत्ति दी जाती है।
बाल श्रम रोकने के लिए विभाग के द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। पिछले माह आधा दर्जन विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
- शक्ति सेन, सहायक श्रम आयुक्त
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राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना ने तोड़ा दम
कासगंज (ब्यूरो)। वर्ष 2006 में राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना शुरू की गई। इसके तहत बाल श्रमिक विद्यालयों में तीन साल का पाठ्यक्रम लागू किया गया। पाठ्यक्रम के तहत 11 से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बाल श्रमिक बच्चों को शिक्षित करना था। विद्यालयों के संचालन की जिम्मेदारी एनजीओ को सौंपी गई। जनपद विभाजन के समय कासगंज जनपद की सीमा में संचालित 40 विद्यालय जनपद के हिस्से में आए। प्रत्येक विद्यालय में 25 बच्चों को पढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। वर्ष 2009 तक के निर्धारित पाठ्यक्रम का एक बैच तो संचालित हो गया, उसके बाद विद्यालय को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शिथिल हो गई।
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एक साल से नही मिला सर्वे का बजट
कासगंज (ब्यूरो)। बालश्रम पर रोक के लिए सर्वे कराने को शासन से बजट मिलता है लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष से बजट नहीं आया है। बजट के अभाव में सर्वे का कार्य भी बाधित है। सर्वे न हो पाने से विभाग के पास बाल श्रमिकों के सही आंकड़े भी संग्रहीत नहीं हो पा रहे।
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संचालित हैं मेधावी छात्र योजना
कासगंज (ब्यूरो)। श्रमिक परिवार के मेधावी बच्चों के लिए योजना संचालित है। कक्षा 5 से 7 तक 70 प्रतिशत अंक लाने पर छात्र को 4000 एवं छात्रा को 4500, कक्षा 8 में छात्र को 5000 एवं छात्रा को 5500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है। 60 प्रतिशत अंक पर कक्षा 9 व 10 में छात्र को 5000 एवं छात्रा को 5500 रुपये, इंटरमीडिएट में छात्र को 8000 रुपये एवं छात्रा को 10000 रुपये तथा स्नातक कक्षा से डिप्लोमा में 10000 से 22000 रुपये तक छात्रवृत्ति दी जाती है।
बाल श्रम रोकने के लिए विभाग के द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। पिछले माह आधा दर्जन विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
- शक्ति सेन, सहायक श्रम आयुक्त