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एलर्जी ने बढ़ाए नेत्र रोगी, ओपीडी में संख्या हुई डेढ़ गुनी
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मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में मरीजों का परीक्षण करतीं चिकित्सक।संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। शहर में धूल के चलते लोगों की आंखों में एलर्जी की समस्या बढ़ी है। मेडिकल कॉलेज की नेत्र इकाई ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़कर दोगुनी तक हो गई है। गर्मी से बढ़ी एलर्जी धीरे-धीरे नाखूना के रूप में लोगों के लिए परेशानी बन रही है। पिछले महीने तक जहां एलर्जी के 40 मरीज प्रतिदिन आ रहे थे, अब यह संख्या बढ़कर 80 हो गई है। मंगलवार को तो इस तरह की समस्याओं के 100 मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज में स्थित नेत्र इकाई ओपीडी में आखों की एलर्जी के मरीजों की संख्या में अचानक से इजाफा हो गया है। एलर्जी के मरीजों की आंखों से पानी आना, सूजन होना, लाल होना, खुजली होना, आंखों का धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही समस्या बढ़ना, धुएं से आंखों में परेशानी बढ़ना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस से ग्रस्त मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज की एसआर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका का कहना है कि धूल- मिट्टी के कण आदि हमारी आंखों के संपर्क में आते हैं, तब कोशिकाएं हिस्टामिन नामक रसायन उत्सर्जित करती हैं। ऐसा होने पर रक्त कोशिकाओं में सूजन आ जाती है और आंखों में खुजली तथा पानी आने की समस्या होने लगती है।
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नाखूना के मरीज कैसे करें बचाव
नेत्र इकाई की एचओडी डॉ. अंजू सिंह बताती हैं कि नाखूना रोग की शुरूआती अवस्था में धूप से बचें। सूर्य की किरणों से बचाव के लिए यूवी प्रोटेक्शन वाला धूप का चश्मा, कैप आदि का प्रयोग करें। कार चलाते समय खिड़कियां बंद रखें और दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का इस्तेमाल करें। ताकि तेज हवा और धूल के कणों से आंखों को बचाया जा सके। आंखों की किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें और नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज में स्थित नेत्र इकाई ओपीडी में आखों की एलर्जी के मरीजों की संख्या में अचानक से इजाफा हो गया है। एलर्जी के मरीजों की आंखों से पानी आना, सूजन होना, लाल होना, खुजली होना, आंखों का धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही समस्या बढ़ना, धुएं से आंखों में परेशानी बढ़ना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
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एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस से ग्रस्त मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज की एसआर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका का कहना है कि धूल- मिट्टी के कण आदि हमारी आंखों के संपर्क में आते हैं, तब कोशिकाएं हिस्टामिन नामक रसायन उत्सर्जित करती हैं। ऐसा होने पर रक्त कोशिकाओं में सूजन आ जाती है और आंखों में खुजली तथा पानी आने की समस्या होने लगती है।
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नाखूना के मरीज कैसे करें बचाव
नेत्र इकाई की एचओडी डॉ. अंजू सिंह बताती हैं कि नाखूना रोग की शुरूआती अवस्था में धूप से बचें। सूर्य की किरणों से बचाव के लिए यूवी प्रोटेक्शन वाला धूप का चश्मा, कैप आदि का प्रयोग करें। कार चलाते समय खिड़कियां बंद रखें और दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का इस्तेमाल करें। ताकि तेज हवा और धूल के कणों से आंखों को बचाया जा सके। आंखों की किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें और नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।