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Etah News: सपा के लिए सबसे मजबूत किला रहा है अलीगंज
Thu, 11 Apr 2024 10:42 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 11 Apr 2024 10:42 PM IST
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एटा। फर्रुखाबाद संसदीय क्षेत्र में शामिल अलीगंज विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मिजाज अलग ही तरह का है। जो भाजपा के लिए कड़वाहट देने वाला रहा है। जबकि सपा के लिए सबसे मजबूत साबित हुआ। यहां तक कि 2014 के चुनाव में प्रचंड मोदी लहर के बीच भी यहां कमल नहीं खिल सका था।
पूर्व में एटा विधानसभा क्षेत्र भी एटा लोकसभा सीट में शामिल था। लेकिन परिसीमन के बाद 2009 में इसे फर्रुखाबाद संसदीय सीट में मिला दिया गया। इस परिसीमन पर हुए पहले चुनाव में भाजपा की ध्वजवाहिका बनकर मिथलेश कुमारी चुनाव लड़ने उतरीं। जबकि सपा का झंडा चंद्रभूषण सिंह थामे हुए थे। हालांकि विजयी बसपा के नरेश चंद्र अग्रवाल 23.26 प्रतिशत मत पाकर विजयी हुई। जबकि सपा को 20.84 मत मिले। भाजपा इससे मामूली पीछे 19.30 प्रतिशत मतों पर रही थी। लेकिन अलीगंज विधानसभा की बात करें तो बसपा 32.17 और सपा 29.77 प्रतिशत पर थी। जबकि भाजपा 11.82 प्रतिशत वोट पा सकी।
इसके बाद 2014 के चुनाव में मोदी की सुनामी छाई हुई थी। इसका असर फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर भी दिखा और भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत को बड़ी जीत हासिल हुई। लेकिन अलीगंज विधानसभा में इस सुनामी के बीच भी भाजपा मात खाई गई थी। सपा प्रत्याशी के आधे वोट भी नहीं हासिल हो सके थे। सपा के रामेश्वर सिंह यादव ने बंपर 57.80 फीसदी वोट प्राप्त किए थे। तो भाजपा के मुकेश राजपूत यहां 27.53 प्रतिशत के आंकड़े तक ही सीमित रहे। जबकि लोकसभा की अन्य चारों विधानसभा सीटों पर वह आगे रहे थे।
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2019 में चुनाव फिर मोदी लहर के बीच ही लड़ा गया था। भाजपा के मुकेश राजपूत लगातार दूसरी बाद यहां से जीतकर सांसद बने। इस बार भाजपा के लिए यह भी मजबूत पक्ष था कि सपा और बसपा का गठबंधन हुआ था और यह सीट बसपा के खाते में चली गई। इस तरह यहां सपा का कोई प्रत्याशी नहीं था। जिसका लाभ भाजपा को मिला और पहली बार यहां सपा के वर्चस्व को भाजपा तोड़ सकी थी। बसपा प्रत्याशी को 36.35 और भाजपा प्रत्याशी को 58.75 प्रतिशत मत मिले थे।
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पूर्व में एटा विधानसभा क्षेत्र भी एटा लोकसभा सीट में शामिल था। लेकिन परिसीमन के बाद 2009 में इसे फर्रुखाबाद संसदीय सीट में मिला दिया गया। इस परिसीमन पर हुए पहले चुनाव में भाजपा की ध्वजवाहिका बनकर मिथलेश कुमारी चुनाव लड़ने उतरीं। जबकि सपा का झंडा चंद्रभूषण सिंह थामे हुए थे। हालांकि विजयी बसपा के नरेश चंद्र अग्रवाल 23.26 प्रतिशत मत पाकर विजयी हुई। जबकि सपा को 20.84 मत मिले। भाजपा इससे मामूली पीछे 19.30 प्रतिशत मतों पर रही थी। लेकिन अलीगंज विधानसभा की बात करें तो बसपा 32.17 और सपा 29.77 प्रतिशत पर थी। जबकि भाजपा 11.82 प्रतिशत वोट पा सकी।
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इसके बाद 2014 के चुनाव में मोदी की सुनामी छाई हुई थी। इसका असर फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर भी दिखा और भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत को बड़ी जीत हासिल हुई। लेकिन अलीगंज विधानसभा में इस सुनामी के बीच भी भाजपा मात खाई गई थी। सपा प्रत्याशी के आधे वोट भी नहीं हासिल हो सके थे। सपा के रामेश्वर सिंह यादव ने बंपर 57.80 फीसदी वोट प्राप्त किए थे। तो भाजपा के मुकेश राजपूत यहां 27.53 प्रतिशत के आंकड़े तक ही सीमित रहे। जबकि लोकसभा की अन्य चारों विधानसभा सीटों पर वह आगे रहे थे।
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2019 में चुनाव फिर मोदी लहर के बीच ही लड़ा गया था। भाजपा के मुकेश राजपूत लगातार दूसरी बाद यहां से जीतकर सांसद बने। इस बार भाजपा के लिए यह भी मजबूत पक्ष था कि सपा और बसपा का गठबंधन हुआ था और यह सीट बसपा के खाते में चली गई। इस तरह यहां सपा का कोई प्रत्याशी नहीं था। जिसका लाभ भाजपा को मिला और पहली बार यहां सपा के वर्चस्व को भाजपा तोड़ सकी थी। बसपा प्रत्याशी को 36.35 और भाजपा प्रत्याशी को 58.75 प्रतिशत मत मिले थे।