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बारिश के बाद गेहूं पर बाजार की भी मार, नहीं हैं खरीदार
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Tue, 05 May 2015 11:44 PM IST
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किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने के सरकार के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। अब बारिश से प्रभावित हुए गेहूं को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर 10 प्रतिशत से ज्यादा खराब गेहूं की खरीद नहीं हो रही, मजबूरी में किसान गेहूं मंडी ले जा रहा है, जहां किसानों के अनुसार व्यापारी गेहूं का मोल मिट्टी के भाव भी नहीं लगा रहे हैं। मंडी में समर्थन मूल्य 1450 के सापेक्ष गेहूं की खरीद 1350 रुपये प्रति क्विंटल हो रही है। इसके अलावा नकद भुगतान न होने की वजह से भी किसान गेहूं को मंडी में ले जा रहा है।
शासनादेश के अनुसार सरकारी क्रय केंद्रों पर उसी गेहूं की खरीद होगी जो 10 प्रतिशत से अधिक खराब न हो। इसके अलावा गेहूं की चमक भी 50 प्रतिशत से अधिक न हो। बता दें कि बरसात की वजह से कुछ किसानों का गेहूं 25-30 प्रतिशत तक खराब हो चुका है। ऐसे में सरकारी केंद्रों पर इनकी खरीद न होने से किसान इसे मंडी ले जा रहा है। जहां व्यापारी भी इसका भाव नहीं दे रहे हैं। फिलहाल 1350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं की खरीद हो रही है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि किसान का गेहूं कैसा भी हो खरीदा जाएगा, लेकिन संबंधित विभाग बयान को तवज्जो देने की जगह शासनादेश को प्राथमिकता देते हैं।
यही कारण है कि सरकारी क्रय केंद्र बरसात से अधिक मात्रा में खराब हुए गेहूं को खरीद नहीं रहे हैं। किसान मुकेश, धर्मवीर का कहना है बरसात की वजह से किसान का गेहूं 25-30 प्रतिशत तक खराब हो चुका है। ऐसे में सरकारी केंद्र खराब गेहूं को नहीं खरीद रहे हैं, वहीं मंडी में भी व्यापारी बहुत सस्ते भाव में ही गेहूं की खरीदारी कर रहे हैं।
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अब तक 5820 एमटी हुई गेहूं की खरीद
गेहूं खरीद के लक्ष्य से हर बार पिछड़ रहा खाद्य विभाग इस बार भी लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं की खरीद करता हुआ नहीं दिख रहा है। लक्ष्य से भटकने का विभाग के पास एक ही बहाना रहता है कि समर्थन मूल्य से मंडी में भाव अधिक रहता है, इसलिए किसान गेहूं को मंडी में लेकर जाता है। जबकि इस बार मंडी के भाव समर्थन मूल्य के आसपास भी भटकते हुए नहीं दिख रहे हैं। इसके बावजूद भी किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं लेकर नहीं आ रहा है। इसका कारण विभाग गेहूं का अधिक मात्रा में खराब होना मान रहे हैं, लेकिन किसान इसका दूसरा कारण नकद भुगतान न होना भी बता रहे हैं। खरीद के यही हालात मंडी में भी हैं। जहां पिछले सालों की अपेक्षा गेहूं बहुत कम आ रहा है। इसके पीछे मंडी व्यापारी सहदेव सिंह चौहान का कहना है कि जिले में गेहूं की पैदावार बहुत अधिक मात्रा में प्रभावित हुई है, ऐसे में किसानों के पास बेचने के लिए गेहूं कम है।
सरकारी गेहूं खरीद के आंकड़े
संस्था लक्ष्य खरीद
खाद्य विभाग 4500 एमटी 629.80 एमटी
पीसीएफ 19500 एमटी 3475 एमटी
यूपीएसएस 4000 एमटी 631.77 एमटी
कर्मचारी कल्याण निगम 500 एमटी 476 एमटी
एफसीआई 3000 एमटी 344 एमटी
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गेहूं की खरीद शासनादेश के अनुसार हो रही है। ऐसे में 10 प्रतिशत से अधिक खराब गेहूं की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं की जा रही है।
- विनय प्रताप, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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शासनादेश के अनुसार सरकारी क्रय केंद्रों पर उसी गेहूं की खरीद होगी जो 10 प्रतिशत से अधिक खराब न हो। इसके अलावा गेहूं की चमक भी 50 प्रतिशत से अधिक न हो। बता दें कि बरसात की वजह से कुछ किसानों का गेहूं 25-30 प्रतिशत तक खराब हो चुका है। ऐसे में सरकारी केंद्रों पर इनकी खरीद न होने से किसान इसे मंडी ले जा रहा है। जहां व्यापारी भी इसका भाव नहीं दे रहे हैं। फिलहाल 1350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं की खरीद हो रही है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि किसान का गेहूं कैसा भी हो खरीदा जाएगा, लेकिन संबंधित विभाग बयान को तवज्जो देने की जगह शासनादेश को प्राथमिकता देते हैं।
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यही कारण है कि सरकारी क्रय केंद्र बरसात से अधिक मात्रा में खराब हुए गेहूं को खरीद नहीं रहे हैं। किसान मुकेश, धर्मवीर का कहना है बरसात की वजह से किसान का गेहूं 25-30 प्रतिशत तक खराब हो चुका है। ऐसे में सरकारी केंद्र खराब गेहूं को नहीं खरीद रहे हैं, वहीं मंडी में भी व्यापारी बहुत सस्ते भाव में ही गेहूं की खरीदारी कर रहे हैं।
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अब तक 5820 एमटी हुई गेहूं की खरीद
गेहूं खरीद के लक्ष्य से हर बार पिछड़ रहा खाद्य विभाग इस बार भी लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं की खरीद करता हुआ नहीं दिख रहा है। लक्ष्य से भटकने का विभाग के पास एक ही बहाना रहता है कि समर्थन मूल्य से मंडी में भाव अधिक रहता है, इसलिए किसान गेहूं को मंडी में लेकर जाता है। जबकि इस बार मंडी के भाव समर्थन मूल्य के आसपास भी भटकते हुए नहीं दिख रहे हैं। इसके बावजूद भी किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं लेकर नहीं आ रहा है। इसका कारण विभाग गेहूं का अधिक मात्रा में खराब होना मान रहे हैं, लेकिन किसान इसका दूसरा कारण नकद भुगतान न होना भी बता रहे हैं। खरीद के यही हालात मंडी में भी हैं। जहां पिछले सालों की अपेक्षा गेहूं बहुत कम आ रहा है। इसके पीछे मंडी व्यापारी सहदेव सिंह चौहान का कहना है कि जिले में गेहूं की पैदावार बहुत अधिक मात्रा में प्रभावित हुई है, ऐसे में किसानों के पास बेचने के लिए गेहूं कम है।
सरकारी गेहूं खरीद के आंकड़े
संस्था लक्ष्य खरीद
खाद्य विभाग 4500 एमटी 629.80 एमटी
पीसीएफ 19500 एमटी 3475 एमटी
यूपीएसएस 4000 एमटी 631.77 एमटी
कर्मचारी कल्याण निगम 500 एमटी 476 एमटी
एफसीआई 3000 एमटी 344 एमटी
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गेहूं की खरीद शासनादेश के अनुसार हो रही है। ऐसे में 10 प्रतिशत से अधिक खराब गेहूं की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं की जा रही है।
- विनय प्रताप, जिला खाद्य विपणन अधिकारी