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यहां तो खाकी-खादी दोनों ही रहीं एक-दूसरे की हमदम
Etah
Updated Mon, 02 Jun 2014 05:30 AM IST
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एटा। जिला बदायूं में हुए घिनौने कृत्य में शामिल पुलिसकर्मियों ने पूरे पुलिस महकमे पर प्रशभनचिह्न लगा दिया है। ऐसे मामलाें में खादी और खाकी हमेशा ही एक-दूसरे को बचाती दिखाई दी है। जिले में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें पुलिस कर्मी और नेता शामिल रहे। मगर कुछ दिन उछलने के बाद मामले दबकर रह गए।
घटना सवा साल पहले की है। कोतवाली देहात क्षेत्र में हजारा नहर पर एक युवक का शव मिला था। थाना सकरौली के गांव इसौली निवासी युवक के घरवालों ने थाना अवागढ़ के गांव सरानी निवासी ससुरालीजनों पर हत्या का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस ने इसौली निवासी बलवीर सहित कई आरोपियों को पकड़ा था। पुलिस कस्टडी में उसे यातनाएं दी गईं। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। बाद में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस पर काफी बवाल भी हुआ था। इस मामले में निवर्तमान एसओ अवागढ़ देवेंद्र शंकर पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया था। एसआई शैलेंद्र कुमार को बर्खास्त कर दिया था। बाद में यह मामला और बढ़े, इसलिए पुलिस ने मृतक के परिवारीजनों को पैसा दिलाकर मामला वहीं शांत करा दिया। बताते हैं कि कुछ महीनाें बाद दोनों ही पुलिसकर्मियों को बहाल कर दिया गया।
उधर, एक मामला थाना पिलुआ के गांव गुलाबपुर में भी हुआ। इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री के एक रिश्तेदार के गनर ने जमीन पर कब्जा करने को लेकर गोलियां चला दी थीं। इसमें दो किसानों की मौत हो गई थी। यह मामला भी काफी चर्चा में रहा। बाद में दब गया। हालांकि आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है। वहीं पिलुआ एसओ को लापरवाही में एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया था। इस मामले में थानाध्यक्ष से बात की तो उनका कहना था कि मामले की अभी भी जांच चल रही है। इस घटना में शामिल दो अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। इधर, एक साल पहले पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुजाता वर्मा की भी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एक पूर्व सांसद का नाम आया था, जिससे मामला काफी चर्चित रहा था।
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घटना सवा साल पहले की है। कोतवाली देहात क्षेत्र में हजारा नहर पर एक युवक का शव मिला था। थाना सकरौली के गांव इसौली निवासी युवक के घरवालों ने थाना अवागढ़ के गांव सरानी निवासी ससुरालीजनों पर हत्या का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस ने इसौली निवासी बलवीर सहित कई आरोपियों को पकड़ा था। पुलिस कस्टडी में उसे यातनाएं दी गईं। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। बाद में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस पर काफी बवाल भी हुआ था। इस मामले में निवर्तमान एसओ अवागढ़ देवेंद्र शंकर पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया था। एसआई शैलेंद्र कुमार को बर्खास्त कर दिया था। बाद में यह मामला और बढ़े, इसलिए पुलिस ने मृतक के परिवारीजनों को पैसा दिलाकर मामला वहीं शांत करा दिया। बताते हैं कि कुछ महीनाें बाद दोनों ही पुलिसकर्मियों को बहाल कर दिया गया।
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उधर, एक मामला थाना पिलुआ के गांव गुलाबपुर में भी हुआ। इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री के एक रिश्तेदार के गनर ने जमीन पर कब्जा करने को लेकर गोलियां चला दी थीं। इसमें दो किसानों की मौत हो गई थी। यह मामला भी काफी चर्चा में रहा। बाद में दब गया। हालांकि आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है। वहीं पिलुआ एसओ को लापरवाही में एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया था। इस मामले में थानाध्यक्ष से बात की तो उनका कहना था कि मामले की अभी भी जांच चल रही है। इस घटना में शामिल दो अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। इधर, एक साल पहले पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुजाता वर्मा की भी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एक पूर्व सांसद का नाम आया था, जिससे मामला काफी चर्चित रहा था।
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