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सस्ते खाद्य तेलों से बढ़ेंगीं होली की खुशियां

Sun, 03 Mar 2013 05:30 AM IST
Etah
Etah Updated Sun, 03 Mar 2013 05:30 AM IST
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एटा। खाद्य तेलों की महंगाई का दंश झेल रहे जनपदवासियों को राहत मिलने वाली है। तिलहन के रिकार्ड उत्पादन से उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों की तेजी से निजात मिलेगी। वहीं अच्छी पैदावार को लेकर किसान भी खासे उत्साहित हैं। बीते पांच वर्ष की तुलना में सर्वाधिक आच्छादन क्षेत्र वाली इस फसल से इस बार दशक के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के आसार हैं।
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जनपद में तिलहन की खेती के दिन बहुर रहे हैं। राई-सरसों व तोरिया की रिकार्ड खेती से उत्साहित किसान उत्पादन से मालामाल हो जाएंगे। अनुकूल मौसम, बारिश एवं बीमारियों से दूर रही फसल को लेकर से किसानों की बांछें खिलीं रहीं। इतना ही नहीं इन दिनों वे इसके उत्पादन औसत से भी वे उत्साहित हैं।
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किसान आनंदपाल सिंह, रामौतार सिंह यादव आदि का कहना है कि लाई-सरसों एवं तोरिया का लगातार गिर रहा आच्छादन क्षेत्र एवं उत्पादन के बाद बढ़ी महंगाई से चिंतित थे। लेकिन किसान इन फसलों की ओर लौट रहे हैं। असरौली निवासी पुष्पेंद्र वर्मा कहते हैं कि इस वर्ष की सरसों की खेती एवं उत्पादन से किसान उत्साहित हैं।
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कृषि विभाग के अनुसार इस बार जनपद में पांच वर्षों का सर्वाधिक आच्छादन क्षेत्र रहा है। इतना ही नहीं उत्पादन ने तो एक दशक के रिकार्ड तोड़े हैं। इन दिनों मिल रहा उत्पादन का औसत सात क्विंटल प्रति एकड़ तक आ रहा है। जो कृषि विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार बीते चार वर्षों में राई/सरसों का आच्छादन क्षेत्रफल
2009-10 2010-11 2011-2012 2012-13 8895 12022 12010 12082 आच्छादन क्षेत्र (हेक्टेयर)
वहीं तोरिया का आच्छादन क्षेत्र
4110 3845 4068 4125
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ये कहते हैं कृषि उपनिदेशक
उप कृषि निदेशक आरपी चौधरी कहते हैं कि आधा दशक बाद तिलहन की खेती से किसान एवं विभाग उत्साहित है। इस वर्ष आच्छादन क्षेत्र ही नहीं बढ़ा है वरन उत्पादन भी खासी वृद्धि हुई है। जो निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप है। जबकि गत वर्ष का उत्पादन काफी कम रहा। तोरिया का उत्पादन लक्ष्य जहां 10.13 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है वहीं सरसों का 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।

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ये हैं कारण
- बीमारियों से मुक्त रही फसल।
- कीट पतंगों का जोर नहीं रहा।
- देरी से हुई बारिश ने माऊं को धो दिया।
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भाव बढ़ने की उम्मीद नहीं
आढ़ती सतीश चंद्र बताते हैं कि पूर्व में चार हजार रुपये क्विंटल तक बिक चुकी सरसों इन दिनों 2800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव है। पखवाड़े पूर्व नई सरसों भी 3500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी है। अच्छी फसल के चलते भाव बढ़ने की उम्मीद नहीं है।
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