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जिले में अनफिट मिले 14 आरक्षी री-मेडिकल में फिट
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नए आरक्षी
- फोटो : dumy pic
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एटा। पुलिस भर्ती के लिए परीक्षा में पास होने के बाद जनपद के 237 युवक-युवतियों का पुलिस लाइन में मेडिकल होना था। 21 फाइलें न आने के चलते 216 का ही परीक्षण हो सका। इनमें 22 को अनफिट पाया गया। अनफिट बताए गए 22 में से 21 आरक्षियों ने बोर्ड पर आरोप लगाते हुए री-मेडिकल की अर्जी दी तो अलीगढ़ में मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए परीक्षण में 21 में से 14 फिट पाए गए। इनके प्रमाण पत्र विभाग को भेज दिए गए हैं।
जिले की पुलिस लाइन में 24, 25 और 26 अप्रैल को पुलिस भर्ती परीक्षा में उत्तीर्ण होकर आरक्षी की श्रेणी में आने वाले 237 में से 216 का मेडिकल परीक्षण किया गया था। मेडिकल के दौरान लगातार तीन दिन मेडिकल बोर्ड पर रुपये लेकर फिट और अनफिट करने के आरोप भी लगे थे। इसका एक ऑडियो भी वायरल हुआ। इसके बाद सीएमओ ने अपनी मौजूदगी में कई आरक्षियों के मेडिकल कराए गए और मामले की जांच की बात भी कही गई।
तीन दिन की प्रक्रिया में जिले में बनाए गए मेडिकल बोर्ड द्वारा पहले दिन 14, दूसरे दिन तीन और तीसरे दिन पांच आरक्षियों को अनफिट बताया गया था। इनमें से एक की लंबाई कम होना और बाकी को अन्य कमियों के चलते बाहर किया गया था। इसके बाद अन्य कमियों के चलते बाहर किए गए 21 आरक्षियों ने मेडिकल बोर्ड पर आरोप लगाए थे कि रुपये न देने के कारण उन्हें बाहर कर दिया गया।
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उन्होंने अलीगढ़ मंडल के अधिकारियों के सामने पेश होकर री-मेडिकल की अर्जी लगाई। अलीगढ़ में मेडिकल बोर्ड गठित कर 21 आरक्षियों की जांच हुई तो इनमें से 14 फिट पाए गए। इन 14 आरक्षियों के फिटनेस प्रमाण पत्र विभाग में पहुंचे तो हड़कंप की स्थिति हो गई। सभी यह सवाल कर रहे थे कि ऐसा तो नहीं कि जानबूझ कर इन आरक्षियों को अनफिट दिखाया गया। मामले में जांच की बात कहने वाले उच्चाधिकारी भी अब लिखित शिकायत आने पर अग्रिम कार्यवाही की बात कह रहे हैं।
री-मेडिकल न होता तो...
एटा में मेडिकल परीक्षण में अनफिट मिलने वाले 14 आरक्षी री-मेडिकल में फिट पाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि यदि दोबारा मेडिकल न कराया गया होता तो आवेदकों को मिला मौका हाथ से निकल गया होता। हालांकि चिकित्सक मानते हैं कि परीक्षण में चोट या अन्य कोई बीमारी पकड़ में नहीं आती है तो संबंधित व्यक्ति को अनफिट ही किया जाता है।
सुबह से ही शुरू हो जाता था ‘खेल’
सूत्र बताते हैं कि बोर्ड में शामिल कुछ लोगों के घर के बाहर सुबह से ही आरक्षियों का जुटना शुरू हो जाता था। विभाग के अंदरखाने के लोग यहां तक कहने से नहीं चूकते कि प्रति आरक्षी 50 हजार रुपये लिया जा रहा है। नहीं देने पर अनफिट कर दिया जाता है।
सीएमओ बोले
अभी तक लिखित रूप से कोई शिकायत नहीं मिली है। जो फेल हो जाते हैं, वह आरोप ही लगाते हैं। री-मेडिकल कराना भी प्रक्रिया में ही शामिल होता है। अनफिट होने पर आवेदकों के पास विकल्प होता है कि वह री-मेडिकल कराने के लिए आवेदन करे। प्रक्रिया के तहत यह आरक्षी री-मेडिकल में पास हो गए। - डा. ए. के. अग्रवाल, सीएमओ, एटा
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जिले की पुलिस लाइन में 24, 25 और 26 अप्रैल को पुलिस भर्ती परीक्षा में उत्तीर्ण होकर आरक्षी की श्रेणी में आने वाले 237 में से 216 का मेडिकल परीक्षण किया गया था। मेडिकल के दौरान लगातार तीन दिन मेडिकल बोर्ड पर रुपये लेकर फिट और अनफिट करने के आरोप भी लगे थे। इसका एक ऑडियो भी वायरल हुआ। इसके बाद सीएमओ ने अपनी मौजूदगी में कई आरक्षियों के मेडिकल कराए गए और मामले की जांच की बात भी कही गई।
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तीन दिन की प्रक्रिया में जिले में बनाए गए मेडिकल बोर्ड द्वारा पहले दिन 14, दूसरे दिन तीन और तीसरे दिन पांच आरक्षियों को अनफिट बताया गया था। इनमें से एक की लंबाई कम होना और बाकी को अन्य कमियों के चलते बाहर किया गया था। इसके बाद अन्य कमियों के चलते बाहर किए गए 21 आरक्षियों ने मेडिकल बोर्ड पर आरोप लगाए थे कि रुपये न देने के कारण उन्हें बाहर कर दिया गया।
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उन्होंने अलीगढ़ मंडल के अधिकारियों के सामने पेश होकर री-मेडिकल की अर्जी लगाई। अलीगढ़ में मेडिकल बोर्ड गठित कर 21 आरक्षियों की जांच हुई तो इनमें से 14 फिट पाए गए। इन 14 आरक्षियों के फिटनेस प्रमाण पत्र विभाग में पहुंचे तो हड़कंप की स्थिति हो गई। सभी यह सवाल कर रहे थे कि ऐसा तो नहीं कि जानबूझ कर इन आरक्षियों को अनफिट दिखाया गया। मामले में जांच की बात कहने वाले उच्चाधिकारी भी अब लिखित शिकायत आने पर अग्रिम कार्यवाही की बात कह रहे हैं।
री-मेडिकल न होता तो...
एटा में मेडिकल परीक्षण में अनफिट मिलने वाले 14 आरक्षी री-मेडिकल में फिट पाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि यदि दोबारा मेडिकल न कराया गया होता तो आवेदकों को मिला मौका हाथ से निकल गया होता। हालांकि चिकित्सक मानते हैं कि परीक्षण में चोट या अन्य कोई बीमारी पकड़ में नहीं आती है तो संबंधित व्यक्ति को अनफिट ही किया जाता है।
सुबह से ही शुरू हो जाता था ‘खेल’
सूत्र बताते हैं कि बोर्ड में शामिल कुछ लोगों के घर के बाहर सुबह से ही आरक्षियों का जुटना शुरू हो जाता था। विभाग के अंदरखाने के लोग यहां तक कहने से नहीं चूकते कि प्रति आरक्षी 50 हजार रुपये लिया जा रहा है। नहीं देने पर अनफिट कर दिया जाता है।
सीएमओ बोले
अभी तक लिखित रूप से कोई शिकायत नहीं मिली है। जो फेल हो जाते हैं, वह आरोप ही लगाते हैं। री-मेडिकल कराना भी प्रक्रिया में ही शामिल होता है। अनफिट होने पर आवेदकों के पास विकल्प होता है कि वह री-मेडिकल कराने के लिए आवेदन करे। प्रक्रिया के तहत यह आरक्षी री-मेडिकल में पास हो गए। - डा. ए. के. अग्रवाल, सीएमओ, एटा