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Etah News: 27 आवेदकों का पीएम आवास योजना का लाभ लेने से इन्कार
Fri, 01 Mar 2024 10:54 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 01 Mar 2024 10:54 PM IST
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एटा। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले शहरी बेघरों को पक्का मकान बनवाने के लिए सरकार ढाई लाख रुपये की मदद मुहैया करा रही है। जिसके लिए काफी मारामारी मची हुई है, लेकिन इस मारामारी के बीच कुछ आवेदक ऐसे भी हैं, जो स्वेच्छा से लाभ छोड़ रहे हैं। 27 लोगों ने आर्थिक स्थिति सुधरने पर योजना का लाभ लेने से इन्कार कर दिया है।
नगरीय क्षेत्र की पीएम आवास योजना के तहत शहरी बेघरों को तीन किस्तों में ढाई लाख रुपये डूडा के माध्यम से दिया जाता है। योजना के लाभ के लिए सबसे बड़ी शर्त है कि आवेदक के पास शहरी क्षेत्र में जमीन हो और उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो, लेकिन तमाम अपात्र लोग भी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए फर्जीवाड़ा कर डालते हैं। इस तरह के मामले पकड़े भी जा चुके हैं। जिन्हें जांच होने के बाद अपात्र घोषित कर योजना से बाहर किया गया, लेकिन इस बार 27 लोगों ने किसी तरह की जांच से पहले ही खुद की आर्थिक स्थिति बेहतर होने का हवाला देते हुए योजना से खुद को अलग कर लिया है।
शहर के ही रहने वाले स्वालबीर सिंह ने भी करीब दो साल पहले आवेदन किया था। इस बार पात्रता सूची आई तो उनका नाम इसमें शामिल था, लेकिन उन्होंने डूडा कार्यालय को सूचना दी कि 20 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर उनकी किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी लग गई है। इसलिए वह अब योजना में शामिल नहीं होना चाहते हैं। शहर के ही रहने वाले रंजीत सिंह ने भी मकान बनवाने के लिए फॉर्म भरा था। अब उनकी सरकारी नौकरी लग गई है। इसके चलते उन्होंने अपना आवेदन निरस्त करने के लिए डूडा कार्यालय में सूचना दी है। पीओ डूडा सुभाषवीर सिंह राजपूत ने बताया कि जो लोग पात्रता की श्रेणी से बाहर हो गए हैं, उनके आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।
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नगरीय क्षेत्र की पीएम आवास योजना के तहत शहरी बेघरों को तीन किस्तों में ढाई लाख रुपये डूडा के माध्यम से दिया जाता है। योजना के लाभ के लिए सबसे बड़ी शर्त है कि आवेदक के पास शहरी क्षेत्र में जमीन हो और उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो, लेकिन तमाम अपात्र लोग भी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए फर्जीवाड़ा कर डालते हैं। इस तरह के मामले पकड़े भी जा चुके हैं। जिन्हें जांच होने के बाद अपात्र घोषित कर योजना से बाहर किया गया, लेकिन इस बार 27 लोगों ने किसी तरह की जांच से पहले ही खुद की आर्थिक स्थिति बेहतर होने का हवाला देते हुए योजना से खुद को अलग कर लिया है।
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शहर के ही रहने वाले स्वालबीर सिंह ने भी करीब दो साल पहले आवेदन किया था। इस बार पात्रता सूची आई तो उनका नाम इसमें शामिल था, लेकिन उन्होंने डूडा कार्यालय को सूचना दी कि 20 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर उनकी किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी लग गई है। इसलिए वह अब योजना में शामिल नहीं होना चाहते हैं। शहर के ही रहने वाले रंजीत सिंह ने भी मकान बनवाने के लिए फॉर्म भरा था। अब उनकी सरकारी नौकरी लग गई है। इसके चलते उन्होंने अपना आवेदन निरस्त करने के लिए डूडा कार्यालय में सूचना दी है। पीओ डूडा सुभाषवीर सिंह राजपूत ने बताया कि जो लोग पात्रता की श्रेणी से बाहर हो गए हैं, उनके आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।
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